उत्तराखंड के बाराहोती में चीनी सैनिकों की घुसपैठ की तुलना डोकलाम में जारी गतिरोध से करना ठीक नहीं है। आईटीबीपी के सूत्र बताते हैं कि यह सामान्य घटना थी और भारतीय जवानों के विरोध जताने के बाद चीनी सैनिक वहां से चले गए थे। वहीं विदेश मंत्रालय सूत्रों का कहना है कि बाराहोती में भारत और चीन की सीमा का स्पष्ट सीमांकन नहीं हुआ है। ऐसे में कभी चीन के सैनिक हमारी तो कभी हमारे सैनिक चीन की सीमा में चले जाते हैं। लेकिन जब इसका एहसास कराया जाता है तो स्थिति सामान्य हो जाती है।
मंत्रालय सूत्रों के अनुसार साल में कम से कम एक बार चीन के सैनिक इस क्षेत्र में पेट्रोलिंग करने आते हैं। भारत भी लगातार अपनी स्थिति की निगरानी करता रहता है। इसलिए 26 जुलाई को भारतीय सीमा में 200-300 मीटर तक चीनी सैनिकों के घुस आने को अहमियत देने की जरूरत नहीं है।
आईटीबीपी के लेह-लद्दाख क्षेत्र में तैनात रहे सूत्र के आनुसार बाराहोती जैसी घटना होती रहती है। इसमें नया कुछ नहीं है। चिंता की बात तब होती है कि जब चीन के सैनिक भारतीय सीमा में घुस आते हैं और भारी विरोध के बाद भी वापस नहीं जाते।
डोकलाम में अभी कायम है पहले की स्थिति
भूटान से सटी चीन की सीमा पर डोकलाम में जारी गतिरोध अभी कायम है। चीन और भारत दोनों देशों की सेनाएं अपनी-अपनी स्थिति में डटी हुई है। हालांकि जल्द ही इस क्षेत्र में मौसम का कहर शुरू हो जाएगा। माना यह जा रहा है कि भारत और चीन दोनों इस समस्या का सम्मानजनक हल निकालने के प्रयास में लगे हैं।
इसके बाबत ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीन के समकक्ष यांग जेइची से चर्चा हुई थी। डोभाल ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात की थी। लेकिन इसके बाद से दोनों देशों की तरफ से डोकलाम में जारी गतिरोध को समाधान को लेकर कोई बयान नहीं आया है।