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कुरुक्षेत्र: जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया बहाल करने की तैयारी, साल के अंत में विधानसभा चुनाव संभव

Sat, 22 Aug 2020 07:44 AM IST
योगेश साहू विनोद अग्निहोत्री, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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कश्मीर के गांदरबल जिले में श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तैनात सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का जवान। - फोटो : PTI
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केंद्र सरकार जल्दी ही जम्मू कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करना चाहती है। सरकार का मानना है कि अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत मिले विशेष राज्य के दर्जे को समाप्त करने और राज्य को दो संघ शासित क्षेत्रों में पुनर्गठित करने के एक साल होने को है। इस दौरान केंद्र सरकार की देखरेख में एक तरफ आतंकवाद और अलगाववाद की कमर तोड़ी जा चुकी है तो दूसरी तरफ विकास को गति देने के लिए इतने बुनियादी काम हुए हैं। अब ऐसे में जम्मू और कश्मीर में राजनीतिक प्रक्रिया शुरू करके विधानसभा के चुनाव कराए जा सकते हैं। पूर्व आईएसएस अधिकारी मुर्मू की जगह उपराज्यपाल पद पर मनोज सिन्हा की नियुक्ति इस दिशा में पहला कदम है।  

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मनोज सिन्हा न सिर्फ इस संघ शासित क्षेत्र के दूसरे उपराज्यपाल हैं बल्कि वह दूसरे राजनीतिक व्यक्ति हैं जिन्हें आतंकवाद और अलगाववाद के जवाब में कश्मीर में विकास और स्थायित्व का मार्ग प्रशस्त करने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके पहले जब जम्मू कश्मीर पूर्ण राज्य था तब पहली बार खांटी राजनीतिक सत्यपाल मलिक को राज्यपाल बनाकर भेजा गया था, जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई और अनुच्छेद 370 व 35 ए को हटाने का रास्ता तैयार किया। इसलिए सिन्हा को अब मलिक से बड़ी लकीर खींचनी होगी।  

नए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा इस बात से संतुष्ट हो सकते हैं कि पिछले एक साल में सामान्य स्थिति की बहाली के लिए कई ऐसे कदम उठाए गए हैं, जो यहां के लोगों का भारत के प्रति विश्वास और मजबूत करेंगे। हालांकि भरोसा जीतने का काम मलिक के कार्यकाल में ही शुरू हो गया था, जब राज्य में 52 नए डिग्री कालेज खोले गए। 282 प्राइमरी स्कूलों को अपग्रेड करके हायर सेकंडरी स्कूल बना दिया गया।
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धनाभाव में रुकी परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त आठ सौ करोड़ रुपए आवंटित करके उन्हें पूरा किया गया। देशभर के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा और देखभाल के लिए राज्य सरकार ने संपर्क अधिकारी नियुक्त किए और खुद राज्यपाल ने लगभग सभी कुलपतियों से बात करके कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया।

मलिक ने सबसे बड़ा काम जम्मू कश्मीर विधानसभा को तब भंग करके किया, जब दिल्ली में भाजपा के कुछ शीर्ष नेता पीडीपी को तोड़कर सरकार बनाने की कोशिश में थे। गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक अगर विधानसभा भंग नहीं होती तो अनुच्छेद 370 और 35ए हटाना मुमकिन नहीं था। इसके बाद पंचायत और स्थानीय निकायों के चुनाव शांतिपूर्वक कराए जा चुके हैं। कुल 58,54,208 मतदाताओं में 74 फीसदी से ज्यादा मतदान के बाद 3850 सरपंचों और 23660 पंचों को चुना गया। इन चुनावों से विधानसभा चुनावों के लिए एक आधार तैयार हो चुका है, जिससे राजनीतिक प्रक्रिया बहाली में मदद मिलेगी।

यहां केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यक्रमों से होने वाले बुनियादी बदलावों को अंजाम देने में जुटे अधिकारियों के मुताबिक अनुच्छेद 370 और 35ए ने आजादी के बाद से ही कश्मीर को शेष भारत की विकास यात्रा से अलग कर दिया था। कुछ चुनिंदा प्रभावशाली लोगों को ही इसका फायदा मिला, लेकिन आम जनता और विशेषकर गरीब नुकसान में रहे। देश के कई सुधारवादी और कल्याणकारी कानून जम्मू-कश्मीर में लागू नहीं हो सके थे।

अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद...

  • पिछले एक साल में अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद सभी केंद्रीय कानून जम्मू कश्मीर में उसी तरह लागू हो गए हैं, जैसे देश के अन्य राज्यों में हैं। इनसे राज्य के कानूनों में भी भारी बदलाव हुआ है। एक साल पहले तक 354 स्थानीय कानून थे, जिनमें 164 खत्म हो गए और 138 को संशोधित किया गया, साथ ही 170 केंद्रीय कानूनों को राज्य में लागू किया गया।
  • यहां केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) की पीठ गठित की गई और पूरे क्षेत्र को केंद्रीय सूचना आयोग एवं केंद्रीय सतर्कता आयोग के अधिकार क्षेत्र में लाया गया। राज्य में सुशासन स्थापित करने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़े स्तर पर राज्य व्यापी कार्रवाई की है। बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार कानून, एससी एसटी विरोधी अत्याचार निरोधक कानून, आव्रजन प्रमाणपत्र से अब तक वंचित रहने वालों को भी यह सुविधा लागू हो गई है।
  • राज्य में रोजगार बढ़ाने की दिशा के पहले चरण में हर स्तर पर दस हजार नौकरियां दी गईं। पहले से नौकरी पाए लोगों के प्रोबेशन काल को पांच साल से घटाकर दो साल कर दिया। आरक्षण का लाभ देने के लिए जरूरी संशोधन हुए। पहाड़ी भाषी समुदाय को चार फीसदी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को दस फीसदी आरक्षण दिया गया।
  • पिछड़े वर्गों की अधिकतम आय सीमा को साढ़े चार लाख रुपए से बढ़ाकर आठ लाख रुपए कर दिया गया। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रहने वालों को भी आरक्षण का लाभ दिया गया। वंचित और कमजोर वर्गों को आरक्षण का लाभ दो फीसदी से बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया गया। अनुसूचित जनजातियों के लिए विधानसभा सीटें भी आरक्षित की गईं।

जीएसटी लागू होने से एक बाजार एक टैक्स...

  • यहां जीएसटी लागू होने से एक बाजार एक टैक्स की व्यवस्था का लाभ भी मिल रहा है। भूमि पंजीकरण की व्यवस्था न्यायपालिका की जगह कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आ गई और स्वतंत्र पंजीकरण विभाग की स्थापना की गई और 77 उप निबंधक नियुक्त किए गए हैं। करीब एक हजार करोड़ रुपए जो राज्य के बाहर जमा थे, उन्हें वापस राज्य के एकीकृत कोष में लाया गया। सारी व्यवस्था और कामकाज ऑनलाइन करके तमाम परेशानी और भ्रष्टाचार को दूर किया गया।
  • अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति में करीब 262 फीसदी, एसी एसटी वजीफे में सौ फीसदी और पिछड़े वर्गों छात्रवृत्ति में 20 फीसदी का इजाफा किया गया है। राज्य आईएसएसएस लाभार्थियों को मिलाकर कुल 7,42,781 और अल्पसंख्यक प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति के लाभार्थियों की संख्या 4,76,670 हो गई। जनता को भी शेष भारत की तरह केंद्र सरकार की लोकप्रिय स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत का लाभ मिलने लगा है। इसके लिए 11.45 लाख गोल्डन कार्ड बने और 82 हजार से ज्यादा को अस्पतालों की सुविधा मिली है। कश्मीर में स्वच्छ भारत मिशन पूरी तरह सफल हुआ और शत प्रतिशत ओडीएफ हो गया है।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवंटित आवासों में 369 फीसदी इजाफा हुआ और जून 2020 तक घोषित लक्ष्य की प्राप्ति 92 फीसदी तक हुई जबकि मार्च 2019 तक यह आंकड़ा महज 41 फीसदी था। जून 2020 तक शहरी क्षेत्र में 72730 और ग्रामीण क्षेत्र में 77252 आवास आवंटित किए गए। सेब किसानों के लिए पहली बार मूल्य आधारित बाजार योजना लाई गई। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना के तहत लक्ष्य अवधि से पहले ही सभी घरों में बिजली कनेक्शन दे दिए गए। उजाला योजना के तहत 15,90,873 घरों में बिजली दी गई। उज्ज्वला योजना के तहत 12,60,685 लाभार्थियों को गैस सिलेंडर दिया गया।

सामाजिक आर्थिक बुनियादी ढांचा...

  • सामाजिक आर्थिक बुनियादी ढांचा और संतुलित क्षेत्रीय विकास के लिए सात नवंबर 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के आर्थिक पैकेज का एलान किया था। जिसके तहत राज्य की आर्थिक संरचना को गति देने के लिए 63 परियोजनाएं मंजूर की गईं थीं।
  • जून 2018 तक इनमें महज सात पूरी की जा सकीं, लेकिन जून 2020 तक 17 परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया। ऊर्जा क्षेत्र में 218 पैकेजों में 128 पूरे कर लिए गए। बिजली विभाग को पांच निगमों में बांटकर 2500 मेगावाट अतिरिक्त बिजली क्षमता बढ़ाई गई। किरू जल बिजली परियोजना में 624 मेगावाट, पकल डल जल बिजली परियोजना में 1000 मेगावाट और रैटल जल बिजली परियोजना में 850 मेगावाट बिजली उत्पादन शुरू हो गया।
  • बिजली वितरण और पारेषण को मजबूत करने के लिए 3400 करोड़ से ज्यादा धन आवंटित किया गया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 214 योजनाएं पूरी हो गईं जिनमें 1326 किलोमीटिर सड़कों का निर्माण करके 148 बस्तियों को जोड़ा गया। 
  • विकास कार्यों से आम जनता को जोड़ने के लिए बैक टू विलेज (बी2वी) कार्यक्रम चल रहा है, इसमें हर राजपत्रित (गैजेटेड) अधिकारी को एक आवंटित पंचायत में दो दिन और एक रात बिताकर लोगों से उनकी समस्याओं और जरूरतों को समझकर विकास योजनाएं बनानी होती हैं।
  • इससे स्थानीय लोगों से करीब 20 हजार विकास कार्यों को चिन्हित कराकर पूरा किया गया। प्रधानमंत्री विकास कार्यक्रमों के तहत किए जाने वाले व्यय में 27 फीसदी से 49 फीसदी की वृद्धि हुई और 17 परियोजनाओं को पूरा किया जा चुका है।
  • जम्मू कश्मीर इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कार्पोरेशन (जेकेआईडीएफसी) की एक दशक से तमाम लंबित परियोजनाओं को लगभग पूरा कर लिया गया है। इसके अंतर्गत 5979 करोड़ रुपए की 2273 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई, जिनमें 506 परियोजनाओं को पूरा कर लिया गया है और 2256 करोड़ रुपए की 963 परियोजनाओं को मार्च 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा।

झेलम नदी की जल संचयन क्षमता बढ़ी और...

  • झेलम बाढ़ नियंत्रण परियोजना के पहले चरण का काम पूरा कर लिया गया है जिससे नदी की जल संचयन क्षमता दस हजार क्यूसेक तक बढ़ गई है। जबकि दूसरे चरण का काम जल्द शुरू हो जाएगा, जिससे जल संचयन क्षमता 15 हजार क्यूसेक और बढ़ जाएगी। मिड डे भोजन योजना को पंचायत स्तर तक लागू कर दिया गया है और कोविड के दौरान लोगों के घरों तक राशन पहुंचाने के भी इंतजाम किए गए हैं। 
  • लोगों में विश्वास बहाली के लिए 36 केंद्रीय मंत्रियों ने 18 से 24 जनवरी 2020 के दौरान जम्मू कश्मीर की यात्राएं कीं और 12 जिलों में साठ स्थानों पर सौ जन सभाएं संबोधित कीं और 210 जन परियोजनाओं का उद्घाटन किया।
  • राज्य के सभी 18 लाख से ज्यादा घरों में पीने के पानी के नलों के कनेक्शन दे दिए गए जिनमें करीब तीन लाख कनेक्शन 2019-20 में दिए गए। लाइट रेल ट्रांजिट सिस्टम में जम्मू में 23 किलोमीटर और 22 स्टेशनों और श्रीनगर में 25 किलोमीटर और 24 स्टेशनों का निर्माण हो चुका है। 10599 करोड़ रुपए की लागत से जम्मू और श्रीनगर में एलिवेटड कॉरिडॉर बन रहा है।
  • शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत आठ लाख हेल्थ कार्ड जारी कर दिए गए। 38 हजार शिक्षकों को नियमित कर दिया गया। चार हजार स्कूलों में सौर उर्जा संयंत्र लगा दिए गए। नए कॉलेज खोलने के साथ डिग्री कॉलेजों में 25 हजार नई सीटें उपलब्ध कराई गईं। 
  • सात नए मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए और पांच नए नर्सिंग कॉलेज, एक राज्य कैंसर संस्थान को मंजूरी दी गई। मेडिकल कॉलेजों में 1400 मेडिकल और पैरामेडिकल सीटें बढ़ाई गईं। युवाओं में खेल के प्रति दिलचस्पी बढ़े इसके लिए हर जिले में एक इंडोर खेल परिसर, हर पंचायत में खेल मैदान की सुविधा दी गई। खेलो इंडिया शीतकालीन खेल के पहले संस्करण का आयोजन गुलमर्ग में किया गया। इसे ब्लॉक स्तर तक आयोजित किया गया।
  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत जम्मू और कश्मीर में आर्थिक सुधारों की प्रगति, किसानों और मछुआरों के कल्याण, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, गरीबों के कल्याण, ऊर्जा क्षेत्र में सुधारों, शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने, निवेश और औद्योगिक सुदृढ़ीकरण एवं विकास, बैंकिंग और वित्तीय तथा ऋण व्यवस्था में सुधार के लिए टास्क फोर्स गठित किए गए हैं।
  • इन तमाम कदमों के साथ साथ ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया गया। सात रोड शो आयोजित किए गए। 13,600 करोड़ रुपए के 168 सहमति पत्रों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। उद्योगों की स्थापना के लिए 6,000 एकड़ सरकारी जमीन चिह्नित की गई।
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किसानों तक पहुंचा लाभ..

  • पांच साल से लंबित श्रीनगर के रामबाग फ्लाईओवर को चालू किया गया। सौभाग्य योजना के तहत 3,57,405 लाभार्थी लाभान्वित हुए। जम्मू में मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत 1353 बच्चों और 381 गर्भवती महिलाओं को टीके लगाए गए। कश्मीर में इसी मिशन के तहत बारामूला और कुपवाड़ा में 2259 बच्चों और 320 महिलाओं का टीकाकरण किया गया।
  • राज्य सरकार की एकीकृत सामाजिक सुरक्षा योजना में 5,92,333 लाभार्थी पंजीकृत किए गए। आयुष्मान भारत के अंतर्गत 11.41 लाख गोल्ड कार्ड बनाए गए और 3,48,370 परिवारों को इसका लाभ मिला। हिमायत योजना के तहत 74324 अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण के लिए विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों में पंजीकृत किया गया। जम्मू कश्मीर में प्रधानमंत्री किसान पेंशन का लाभ 9.86 लाख किसानों को मिला।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इन फैसलों के बाद सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाने वाली कश्मीर घाटी में अक्तूबर 2019 में ही पोस्ट पेड मोबाइल सेवाएं बहाल कर दी गईं। खंड विकास परिषदों के चुनाव कराए गए।
  • अक्तूबर के आखिर में ही यूरोपीय संसद के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल का दौरा हुआ। दो नवंबर को जम्मू क्षेत्र में लैंड लाइन फोन पर ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई। 12 नवंबर को श्रीनगर बारामूला रेल सेवा शुरू हो गई।
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