प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द अपने मंत्रिमंडल का चौथा और आखिरी विस्तार कर सकते हैं। आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राज्यों के सियासी समीकरण और सहयोगियों को साधने के लिए शीर्ष स्तर पर विचार-विमर्श शुरू हो गया है।
इस बारे में सहयोगी दलों से भी बातचीत का सिलसिला शुरू किया जाएगा। भाजपा सूत्रों के मुताबिक, कर्नाटक विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद मिशन-2019 की पुख्ता तैयारी के लिए मंत्रिमंडल विस्तार पर नए सिरे से विचार शुरू हुआ है।
पार्टी और सरकार के शीर्ष नेतृत्व में इसे लेकर आम सहमति है। इस क्रम में सहयोगियों से संवाद और विभिन्न राज्यों के सियासी समीकरण पर मंथन करने की योजना बनाई गई है। वैसे भी तीसरे विस्तार में एनडीए में शामिल जदयू को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व न देकर प्रधानमंत्री ने एक और विस्तार का विकल्प खुला रखा था।
भाजपा और सरकार के शीर्ष नेतृत्व में विस्तार पर सहमति
दरअसल पिछले साल सितंबर में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में जदयू को प्रतिनिधित्व नहीं मिला था। साथ ही एक कैबिनेट रैंक पर सहमति न बनने के कारण शिवसेना की हिस्सेदारी भी मंत्रिमंडल में बढ़ नहीं पाई थी। उस दौरान अन्नाद्रमुक को भी मंत्रिमंडल में शामिल करने पर चर्चा हुई थी, लेकिन पार्टी में दो धड़ों के बीच मतभेद के चलते इस पर अंतिम फैसला नहीं हो सका था। अब संभावित विस्तार में एनडीए के नए साथियों को प्रतिनिधित्व देने और नाराज साथियों को साधने की कोशिश की जाएगी।