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अमेरिकी तर्ज पर साइबर सुरक्षा की तैयारी, रैनसमवेयर वायरस से निपटने की कोशिश

Thu, 07 Jun 2018 04:05 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रैनसमवेयर वायरस जैसे खतरनाक साइबर हमलों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने डिजिटल भुगतान और डाटा की सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत केंद्र और राज्य के हर सरकारी या सार्वजनिक उपक्रम को महत्वपूर्ण कंप्यूटर, गैजेट्स और डिवाइस की पहचान कर उनकी सुरक्षा चाक-चौबंद करनी होगी। साथ ही साइबर सुरक्षा समिति बनेगी और बिना उसकी इजाजत के कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।   

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साइबर हमलों के मद्देनजर केंद्र ने डिजिटल भुगतान और डाटा सुरक्षा के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए

केंद्र ने बैंकों, वित्तीय संस्थानों, दूरसंचार, यातायात, हवाई अड्डे और रेलवे सहित देश के हर सरकारी महकमे को महत्वपूर्ण कंप्यूटर उपकरणों की पहचान करने का निर्देश जारी किया है। सभी को पहचान के बाद महत्वपूर्ण कंप्यूटर समेत अन्य को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर घोषित करना होगा। इसकी सूची इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को देनी होगी। 

नए मानकों के अनुसार साइबर सुरक्षा की तैयारी
 
केंद्र के निर्देश अमेरिका में की जा रही साइबर सुरक्षा की तर्ज पर तैयारी की जा रही है, जहां महत्वपूर्ण और सामान्य के हिसाब से सिस्टम की सुरक्षा की जाती है। अमेरिका ने वर्गीकरण के आधार पर सुरक्षा के लिए 2001 में पैट्रीयट एक्ट बनाया था। साल 2017 में वन्नाक्राई नाम के रैनसमवेयर के हमले के बाद केंद्र साइबर सुरक्षा पर लगातार कदम उठा रहा है। वन्नाक्राई अटैक में लाखों कंप्यूटरों का डाटा बर्बाद कर दिया गया था। इसके बाद दुनियाभर के देशों ने साइबर सुरक्षा के नए मानक तैयार किए हैं। 
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साइबर सुरक्षा समिति बनाने का निर्देश

केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम- 2000 की धारा 70 के तहत नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें केंद्र, राज्य के मंत्रालयों और विभागों को अधिकारियों की एक साइबर सुरक्षा समिति बनाने को कहा गया है। इसका नेतृत्व मुख्य आईटी अधिकारियों को सौंपा जाएगा। जबकि राष्ट्रीय स्तर पर क्रिटिकल सूचना संरक्षण केंद्र से निगरानी की जाएगी। निर्देशों में कहा गया है कि नेटवर्क में बदलाव के लिए हर सरकारी महकमे को समिति से मंजूरी लेनी होगी। साइबर हमले की जानकारी तत्काल समिति को देनी होगी या हर हाल में दो घंटे के भीतर देनी होगी।

सिस्टम का सालाना सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य 

केंद्र द्वारा जारी निर्देशों में कहा गया है कि हर विभाग को सिस्टम का सुरक्षा ऑडिट साल में एक बार कराना अनिवार्य होगा। साथ ही बदलाव का हर रिकॉर्ड रखना होगा और जोखिमों की जांच भी करानी होगी। निर्देशों में विभागों को साइबर सुरक्षा ऑपरेशन केंद्र बनाने को भी कहा गया है। साथ ही नेटवर्क में हुई हर गतिविधि का डाटा संजोने का निर्देश दिया गया है। गौरतलब है कि साइबर मामलों के विशेषज्ञ पवन दुग्गल ने नए दिशा-निर्देशों पर कहा कि साइबर हमले में पहले की तैयारी नुकसान से बचाने में कारगर साबित होगी। लेकिन सरकारी अधिकारी नए दिशा-निर्देशों को लागू करने में कितना कामयाब होंगे यह तो वक्त ही बताएगा।

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