एक बार फिर सरकार के आम आदमी को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करने के दावों और वादों की पोल खुल गई। मामला उड़ीसा के रायगढ़ जिले का है। जहां एक गर्भवती महिला को एम्बुलेंस नहीं मिली तो परिजनों को महिला को स्ट्रेचर पर रखकर नदी पार करके ले जाने को मजबूर होना पड़ा।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक उड़ीसा के रायगढ़ जिले के एक गांव में महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने एम्बुलेंस के लिए नजदीकी अस्पताल से संपर्क किया लेकिन एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाई। जिसके बाद परिजनों को मजबूरन गर्भवती महिला को स्ट्रेचर पर रखकर नदी पार करके ले जाना पड़ा।
इस तरह का यह उड़ीसा का दूसरा मामला है। कुछ महीने पहले ओडिशा में अस्पताल द्वारा पत्नी का शव ले जाने के लिए दाना मांझी को एंबुलेंस देने से मना कर दिया गया था। इसके बाद उन्हें शव को 10 किलोमीटर अपने कंधों पर ले जाना पड़ा था। ये तस्वीरें दुनियाभर में भारत की शर्मिदंगी का कारण बनी थीं।
मालूम हो कि हाल के दिनों में देश के कई हिस्सों से ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब अस्पातालों की ओर से पीड़ित लोगों को एम्बुलेंस नहीं मिल पाई। अभी बीते कुछ दिन पहले बिहार के मुजफ्फरपुर में मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना घटी। एक सरकारी अस्पताल में एम्बुलेंस नहीं मिली तो परिजनों ने महिला का शव हाथ में उठाकर ले जाना पड़ा।
महिला 25 दिनों से अस्पताल में भर्ती थी बाद में उसकी मौत हो गई। तब मृतक महिला के पति ने बताया था कि सरकारी अस्पताल में एंबुलेंस नहीं मिली और उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि प्राइवेट एंबुलेंस किराए पर ले सकें।
Odisha: Pregnant woman forced to cross river on a stretcher carried by her relatives in Rayagada district due to unavailability of ambulance pic.twitter.com/IKac0Vt10L
— ANI (@ANI_news) July 12, 2017