सुप्रीम कोर्ट ने प्रयागराज के आर्य कन्या डिग्री कॉलेज के चेयरपर्सन को किसी तरह का राहत देने से इनकार कर दिया है। चेयरपर्सन पर गलत तरीके से इस पद को हासिल करने का आरोप है। ये कॉलेज महर्षि दयानंद संस्थान के अंतगर्त है और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के संबंद्ध है।
जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस विनीत नारायण की पीठ ने चेयरपर्सन पंकज जायसवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा का चल रहे मुकदमे को निरस्त करने की गुहार की थी। पीठ ने जायसवाल को राहत देने से इनकार करते हुए ट्रायल झेलने के लिए कहा है। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी मुकदमा को निरस्त करने से इनकार कर दिया था।
मामले के मुताबिक, जून 2016 में महर्षि दयानंद संस्थान में चुनाव हुए थे। आरोप है कि पंकज जायसवाल ने फर्जीवाड़ा कर आर्य कन्या डिग्री कॉलेज का चेयरमैन का पद हासिल कर लिया। साथ ही उन्होंने आर्य कन्या इंटर कॉलेज के प्रबंधक का पद ही हासिल कर लिया। इसके बाद पंकज जायसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। नवंबर, 2017 में एफआईआर दर्ज की गई थी।
उनके खिलाफ चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है। इसके बाद जायसवाल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मुकदमा निरस्त करने की गुहार की थी लेकिन हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन यहां भी कोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार करते हुए मुकदमा झेलने के लिए कहा है।
शिकायकर्ता वकील उपेन्द्र विक्रम सिंह के मुताबिक, पंकज जायसवाल केखिलाफ जमानत वारंट जारी है। लेकिन वह अदालत से भागते फिर रहे हैं। चार्जशीट दायर हाने के बावजूद वह पद पर बने हुए हैं। इतना ही नहीं वर्ष 2013 के एक मामले में हाईकोर्ट ने जायसवाल के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी भी की थी, बावजूद इसके तमाम नियमों को ताक पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें कॉलेज का चेयरमैन नियुक्त किया गया था।