अंतरराष्ट्रीय विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख प्रवीण भाई तोगड़िया ने सर संघचालक मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कई आरोप लगाए हैं। तोगड़िया का कहना है कि वह केंद्र में मोदी सरकार के सत्ता में आने के चार साल बाद तक विश्व हिंदू परिषद में थे। सभी बैठकों में रहते थे और कभी भी सर संघचालक मोहन भागवत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए नहीं कहा।
तोगड़िया का कहना है कि भाजपा ने सत्ता में आने पर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का वादा भले किया था, लेकिन 2014 में केंद्र में और 2017 में उ.प्र. में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद भी यह भाजपा के एजेंडे में नहीं था। पिछले साढ़े चार साल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार भी राम जन्मभूमि अयोध्या नहीं गए हैं।
तोगड़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री जानते थे कि अयोध्या जाने पर क्या संदेश जाएगा। चूंकि केंद्र सरकार को राम मंदिर बनाने की दिशा में कुछ नहीं करना था, इसलिए उन्होंने वहां जाने से भी परहेज किया। जबकि तीन तलाक के मुद्दे पर आध्यादेश और फिर कानून लाने की पहल की गई। इतना ही नहीं गौरक्षा के लिए आगे आए लोगों को प्रधानमंत्री ने गौरक्षा के गुंडे कहकर संबोधित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा और संघ ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं की। तोगड़िया का कहना है कि प्रधानमंत्री का व्यवहार इतना साबित करने के लिए पर्याप्त है कि भाजपा को हिंदू का केवल वोट चाहिए। हिन्दुत्व को छोड़कर वह अलग हो चुकी है।