केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अगुवाई में मानव संसाधन मंत्रालय भारतीय प्रबंधन संस्थान के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन की नियुक्ति में सरकार की भूमिका को खत्म करने पर सहमत हो गया है। हालांकि कुछ ही महीने पहले पूर्व मानव संसाधन मंत्री स्मृति ने आईआईएम अहमदाबाद की ओर से चेयरमैन पोस्ट के लिए सुझाए गए कॉरपोरेट दिग्गजों के एक पैनल को खारिज कर दिया था।
मई महीने में स्मृति ईरानी ने चौंकाते हुए अपने फैसले में आईआईएम अहमदाबाद की ओर से चुने गए नामों को खारिज कर दिया था। इनमें इंफोसिस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के चेयरमैन आर सेशासये, एचडीएफसी बैंक के चेयरमैन दीपक पारेख और हीरो मोटर कॉर्प के सीएमडी पवन मुंजाल का नाम शामिल था।
ईरानी ने चौंकाया
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गौरतलब है कि बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन एएम मलिक के 31 दिसबंर 2015 को इस्तीफा देने के बाद नए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की नियुक्ति के लिए इन नामों को आईआईएम अहमदाबाद ने सुझाया था। लार्सन एंड टर्बो लिमिटेड के चेयरमैन एएम मलिक ने अपने कार्यकाल के खत्म होने से दो साल पहले ही बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया।
स्मृति ने आईआईएम अहमदाबाद के सुझाए नामों को खारिज करने के पीछे कोई कारण नहीं बताया। ऐसे में ईरानी के फैसले को प्रतिष्ठित प्रबंधन संस्थानों की स्वायत्ता पर हमला माना गया।
कैबिनेट विस्तार के बाद एचआरडी मंत्रालय ने प्रधानमंत्री कार्यालय की सिफारिश को स्वीकार करने का फैसला किया। इसके बाद सभी आईआईएम ऐसे फैसले बिना मंत्रालय की इजाजत के ले सकेंगे। इस संदर्भ में तैयार ड्राफ्ट को कैबिनेट की मंजूरी के लए भेजा गया है।
पीएमओ ने की थी इसकी सिफारिश
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इससे पहले ईरानी के कार्यकाल में तैयार किए गए बिल के मुताबिक चेयरमैन की नियुक्ति बोर्ड ऑफ गवर्नर्स से सलाह के बाद राष्ट्रपति करेंगे। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि चेयरमैन की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय सरकार का ही होगा। सूत्रों के मुताबिक नए ड्राफ्ट में सरकार की भूमिका खत्म कर दी गई है।
गौरतलब है कि पिछले महीने पीएमओ में हुई बैठक में बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन की नियुक्ति में सरकार की भूमिका खत्म करने पर फैसला किया गया।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने मंत्रालय की उन दलीलों को स्वीकार कर लिया, जिसमें मंत्रियों को समन्वय समिति के प्रमुख के तौर पर नियुक्त करने और आईआईएम के काम की राष्ट्रपति द्वारा समीक्षा को बरकरार रखा गया है।