फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Prajwal Revanna: 'सबूत कमजोर और...', हाईकोर्ट में रेवन्ना के वकील बोले- मीडिया ट्रायल से फैसला हुआ प्रभावित

Sat, 15 Nov 2025 11:14 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

Prajwal Revanna Case Update: कर्नाटक हाईकोर्ट में प्रज्वल रेवन्ना की दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई में बचाव पक्ष ने दावा किया कि ट्रायल कोर्ट मीडिया दबाव और कमजोर सबूतों के आधार पर प्रभावित हुआ। वकील ने देरी, सबूतों की कस्टडी चेन और जांच प्रक्रिया पर गंभीर खामियों का आरोप लगाया।

विज्ञापन
पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स / एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक हाईकोर्ट में पूर्व जेडी(एस) सांसद प्रज्वल रेवन्ना की दुष्कर्म केस में हुई दोषसिद्धि के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई एक बार फिर तेज हो गई है। रेवन्ना के वकील ने अदालत में दावा किया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला मीडिया ट्रायल और भावनात्मक माहौल से प्रभावित था। उनका कहना है कि फैसला ठोस सबूतों के आधार पर नहीं, बल्कि बाहरी दबावों और भावनात्मक तत्वों पर आधारित था।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति केएस मुदगल और न्यायमूर्ति वेंकटेश नाइक की डिवीजन बेंच ने मामले पर सुनवाई की। रेवन्ना की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने जीवनभर की सजा ऐसे सबूतों पर दी, जिनमें कई विरोधाभास थे। उन्होंने कहा कि गवाहों के बयान मेल नहीं खाते और कोर्ट ने पीड़िता की भावनात्मक स्थिति को आधार बना लिया, जबकि कानून में यह पर्याप्त आधार नहीं है।

देरी और सबूतों में कमियां
बचाव पक्ष ने दावा किया कि पीड़िता ने घटना की शिकायत दर्ज कराने में तीन से चार साल की देरी की और पुलिस के पास पहुंचने के बाद भी बयान दर्ज करने में 48 घंटे तक का अंतर रहा। उन्होंने कहा कि इन देरी के कारण पूरे मामले पर सवाल उठते हैं। वकील ने आगे कहा कि सबूतों की कस्टडी चेन ठीक से स्थापित नहीं की गई, जब्त किए गए नमूनों की सीलिंग और स्टोरेज में गंभीर कमी रही और कई अहम अफसरों का बयान तक दर्ज नहीं किया गया।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- भाजपा की इस रणनीति का जवाब कहां से लाएगा विपक्ष? पढ़ें जीत की पूरी इनसाइड स्टोरी

जांच प्रक्रिया पर सवाल
बचाव पक्ष ने मेडिकल बोर्ड के कुछ सदस्यों की जांच प्रक्रिया को असामान्य बताया और कहा कि कई प्रक्रियाएं मानक नियमों के विपरीत की गईं। उनका कहना था कि इन अनियमितताओं को नज़रअंदाज कर दिया गया और इससे अभियोजन पक्ष की पूरी कहानी पर संदेह गहराता है। वकील ने यह भी कहा कि ट्रायल कोर्ट ने 1 अगस्त को दोषसिद्धि सुनाई और अगले ही दिन सजा दे दी, जिससे रेवन्ना को दंड निर्धारण पर अपनी बात रखने का उचित मौका नहीं मिला।

अंतरिम जमानत की मांग
रेवन्ना की ओर से अंतरिम जमानत की भी मांग की गई। वकील ने कहा कि रेवन्ना एक साल से जेल में हैं और जब अभियोजन पक्ष की नींव कमजोर है, तब उन्हें और अधिक जेल में रखना उचित नहीं है। रेवन्ना ने अपने बचाव में कहा है कि पीड़िता के बयान में विरोधाभास हैं और जो डिजिटल व वैज्ञानिक सबूत पेश किए गए, उनमें कई असंगतियां हैं। वे इन आधारों पर हाईकोर्ट से राहत मांग रहे हैं।
विज्ञापन


जानें पूरा मामला
यह केस 48 वर्षीय महिला से जुड़े आरोपों से शुरू हुआ, जो हासन जिले के होलेनरसीपुरा स्थित गन्निकाडा फार्महाउस में घरेलू सहायक के रूप में काम करती थीं। महिला ने दावा किया कि 2021 में रेवन्ना ने उनके साथ दो बार दुष्कर्म किया—एक बार हासन के फार्महाउस में और दूसरी बार बंगलूरू स्थित घर में। ट्रायल कोर्ट ने वीडियो फुटेज, डीएनए जांच और पीड़िता के कपड़ों पर मिले जैविक नमूनों जैसे सबूतों के आधार पर उन्हें दोषी माना। रेवन्ना के खिलाफ कुल चार केस दर्ज हैं और एसआईटी जांच कर रही है। यह मामला तब सामने आया जब कथित वीडियो वाले पेन ड्राइव 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले हासन में फैलने लगे थे। हाईकोर्ट इस अपील की अगली सुनवाई 25 नवंबर को करेगा।




 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें