नागरिकता विधेयक को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का घटक दल असम गण परिषद (अगप) सरकार पर दबाव बढ़ा रही है।
इसी कड़ी में अगप के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री प्रफुल्ल कुमार महंत ने कहा है कि केंद्र सरकार यदि नागरिकता (संशोधन) विधेयक पर अड़ी रहती है तो उनकी पार्टी राज्य में भाजपा की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार से नाता तोड़ लेगी।
महंत ने कहा कि उक्त विधेयक के पारित होने की स्थिति में असम के लोग अपने ही राज्य में अल्पसंख्यक बन जाएंगे और परिस्थितियां बेहद खतरनाक हो जाएंगी।
एनआरसी के अंतिम मसौदे से 40 लाख लोगों के नाम बाहर होने का जिक्र करते हुए महंत ने कहा कि उक्त विधेयक पारित होने से इनमें से तमाम हिंदुओं को अपने आप नागरिकता मिल जाएगी।
ध्यान रहे कि अगप शुरू से ही उक्त विधेयक का विरोध करती रही है। उसमें पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आने वाले हिंदू शरणार्थियों को देश की नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। राज्य के कई अन्य संगठन भी इसके खिलाफ हैं।