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प्रदीप खरोला ने संभाली एयर इंडिया की जिम्मेदारी, इस वजह से आए थे चर्चाओं में

Mon, 11 Dec 2017 03:13 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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pradeep singh kharola
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तीन महीने बाद एयर इंडिया को अब अपना स्‍थायी मुखिया मिल गया है, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला ने एयर इंडिया के चेयरमैन के तौर पर चार्ज संभाल लिया है। तीन महीने पहले अस्‍थायी चीफ बनाए गए राजीव बंसल ने खरोला को चार्ज सौंपा।
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सरकार ने बीते 23 नवंबर को कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी राजीव बंसल की जगह खरोला को एयर इंडिया का चेयरमैन और एमडी बनाने की घोषणा की थी। बता दें कि बीते चार महीनों में एयर इंडिया में तीन बार सत्ता परिवर्तन हो चुका है।
  Pradeep Singh Kharola took charge as CMD Air India from Rajiv Bansal pic.twitter.com/OxTSQqKvTI — ANI (@ANI) December 11, 2017



यूपी में हुए एक बड़े रेल हादसे के बाद एयर इंडिया के पूर्व चेयरमैन अश्विनी लोहानी को नई जिम्मेदारी देते हुए रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया ‌था। जिसके बाद सरकार ने अंतरिम तौर पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और पेट्रोलियम मंत्रालय में सचिव राजीव बंसल को अस्‍थायी तौर पर एयर इंडिया का चेयरमैन बनाया था।
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इसी बीच बड़े घाटे से जूझ रही एयर इंडिया को उबारने के लिए सरकार किसी योग्य चेहरे की तलाश करती रही। सरकार की तलाश पूरी हुई कर्नाटक के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और बंगलूरू मेट्रो के सीएमडी प्रदीप सिंह खरोला पर। 
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जानिए कौन हैं प्रदीप खरोला, और क्यों हुए थे प्रसिद्ध 

- फोटो : ani
एयर इंडिया के नए चीफ प्रदीप खरोला अभी तक बंगलूरू मेट्रो रेल कार्पोरेशन के एमडी थे। कर्नाटक में खरोला अपनी कार्यप्रणाली और प्रबंध कुशलता के चलते काफी चर्चाएं बटोर चुके हैं। उन्हें लंबे समय तक घाटे में रहे पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मुनाफे में ले जाने का श्रेय जाता है।

खरोला के कॅरियर को उस समय उछाल मिला जब बेंगलूरु 'सिलिकॉन वैली' के रूप में दुनिया की आउटसोर्सिंग राजधानी के रूप में उभरा। इसी दौरान साल 2000 में खरोला ने बैंगलोर मेट्रोपोलिटिन ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन के चेयरमैन के रूप में काम संभाला, अपनी अलग कार्यशैली और प्रबंध क्षमता के चलते उन्होंने जल्द ही लंबे समय से घाटे में चल रही इस सावर्जनिक परिवहन सेवा को मुनाफे में ला दिया।

उन्हीं के कार्यकाल में बंगलूरू की सड़कों पर एयरकंडीशन बसें चलना शुरू हुईं। जब तक BMTC का जिम्मा खरोला के हाथों में रहा यह जबरदस्त मुनाफे में रही। उनकी इस क्षमता को देखते हुए उन्हें बंगलूरू मेट्रो की जिम्मेदारी भी दी गई। हालांकि उनके लिए यह इतना आसान भी नहीं रही, क्योंकि 42 किलोमीटर लंबी परियोजना का काम एक दशक से लटका हुआ था, खरोला ने आते ही इसे तेजी दी और जल्द बंगलूरू में मेट्रो के फेरे शुरू हो गए।

एयर इंडिया में उन्हें लाने के पीछे भी सरकार की यही मंशा है कि लंबे समय से घाटे में चल रही इस सरकारी कंपनी को मुनाफे में लाया जा सके। हालांकि चर्चाएं इस बात की भी हैं कि सरकार एयर इंडिया को प्राइवेट हाथों में बेचने की तैयारी शुरू कर चुकी है इसलिए खरोला को लाया गया है कि वह जल्द से जल्द इस काम को अंजाम दे सकें।  
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