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देश में पीपीई किट की स्थिति : पहले तैयार नहीं था बाजार... अब रफ्तार से हो रहा निर्माण

Thu, 16 Apr 2020 11:09 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीपीई किट यानी पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट किट... यह किट उन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इसके अलावा जनसंपर्क में आने वाले जैसे पुलिस कर्मी और लॉकडाउन की ड्यूटी में तैनात कर्मियों के लिए भी यह किट बहुत जरूरी है। यह किट किसी भी प्रकार के बाहरी इंफेक्शन से सुरक्षा प्रदान करती है। कोरोना वायरस महामारी के सामने आने के बाद इसकी मांग एकाएक बढ़ी है। देश में कई डॉक्टरों के कोरोना से संक्रमित होने के बाद इसे लेकर लोगों के मन में सवाल भी उठ रहे हैं... जैसे कि देश में पीपीई किट निर्माण की क्या स्थिति है, क्या हमें बाहरी देशों से पीपीई किट मंगाने की जरूरत है, सरकार देश में बन रही किट खरीदने के लिए क्या कर रही है और इनकी गुणवत्ता का क्या पैमाना है। 
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पीपीई सूट बनाते कर्मचारी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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सर्जिकल उत्पाद बनाने वाली और पीपीई किट का निर्माण करने वाले एक ब्रांड क्यूरॉल प्लस के विवेक भटनागर कहते हैं कि कोरोना वायरस का प्रसार एकदम से हुआ। इससे पहले देश में पीपीई किट की कुछ खास मांग नहीं थी। इसलिए पीपीई किट का निर्माण भी उसी के अनुरूप था, बाजार में जागरूकता की कमी थी। लिहाजा जब देश में कोरोना वायरस का प्रसार हुई तो पीपीई किट की किल्लत हुई। हालांकि, सरकार पीपीई निर्माण की अनुमति दे चुकी है, ऐसे में बड़े स्तर पर इन किट का निर्माण किया जा रहा है।   

तीन तरह की होती हैं पीपीई किट

किट के प्रकार को लेकर भटनागर कहते हैं, पीपीई किट तीन तरह की होती हैं- पहली अनटेस्टेट, यह एकदम सामान्य किट है जो गंदगी और गीले बैक्टीरिया से सुरक्षा देती है, यह 40-45 जीएसएम की होती है। भारत में इनका स्टॉक बाजार में था... तो देश में कोरोना के शुरुआती दौर में यही उपलब्ध थीं। इसके बाद 60-65 जीएसएम की पीपीई किट होती है, यह मानकों के अनुरूप रहती है और भारत सरकार इन्हीं किट की खरीद कर रही है। सूरत-अहमदाबाद की कुछ कंपनियां बहुत बेहतर क्वालिटी की किट बना रही हैं। तीसरी किट 100 जीएसएम की होती है। 

गुणवत्ता पर है सरकार की नजर

पीपीई किट की गुणवत्ता पर सरकार किस तरह नजर रख रही है, इस सवाल पर भटनागर कहते हैं कि सरकार पीपीई किट की गुणवत्ता और इनकी कालाबाजारी रोकने पर पूरा ध्यान दे रही है। पहली बात तो किसी भी कंपनी को इनके निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही और जिन कंपनियों को इसकी अनुमति दी जा रही है वहां कच्चे माल से लेकर तैयार किट की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। किट की कालाबाजारी के सवाल पर वह कहते हैं कि सरकार ने सख्त हिदायत दे रखी है कि 650 रुपये से ज्यादा में इस किट को नहीं बेच सकते। 

एक पीपीई किट में यह होता है

एक पीपीई किट में ऑल कवर सूट, सर्जिकल ग्लव्स (दस्ताने), चेहरे और आंखों को बचाने के लिए गॉगल्स या फेस शील्ड, जूते ढकने के लिए कवर और डिस्पोजेबल बैग है। पहले ग्लव्स और फेस शील्ड जैसे उपकरण अधिकतर चीन से ही आते थे, इनकी ज्यादा मांग नहीं थी तो यहां इनकी फैक्टरियां भी खाली थीं। हालांकि, अब नोएडा में कुछ कंपनियों ने इनका निर्माण शुरू कर दिया है। भटनागर बताते हैं कि अब ये फैक्टरियां लंबे समय तक चलेंगी क्योंकि इनकी मांग अब लगातार बनी रहने वाली है। 

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