सौर ऊर्जा के बढ़ते उपयोग से देश में लगातार दूसरे साल कोयले से बिजली उत्पादन में 5 फीसदी की कमी आई है। इस कमी का एक कारण परंपरागत बिजली की घटती मांग भी है। देश में 2018 तक बिजली का उत्पादन कोयले से ही होता था, लेकिन 2019 से सौर ऊर्जा संयंत्रों के बढ़ने और पिछले साल कोरोना के कारण लॉकडाउन ने कोयले पर निर्भरता कम करने में और मदद की।
ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े थिंक टैंक एम्बर के अध्ययन में कहा गया है कि देश के अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बढ़ते कदमों और एक के बाद एक नीतिगत फैसले लेकर साफ कर दिया है कि देश की प्रतिबद्धता ‘क्लीन एनर्जी’ की ओर है।
बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल के मुकाबले बिजली उत्पादन में कोयले का इस्तेमाल 8 फीसदी घटा है। इसके बावजूद भारत में अब भी कोयले से ही ज्यादातर बिजली का उत्पादन हो रहा है, जो कुल उत्पादन का 71 फीसदी है।