एक ओर ‘पढ़ें बेटियां - बढ़ें बेटियां’ के नारे के साथ सरकार महिला सशक्तिकरण का तानाबाना बुन रही है, तो वहीं गरीबी बेटियों की शिक्षा की राह का रोड़ा बनी हुई है। इसकी बानगी मऊरानीपुर के गांव बुढ़ाई में मजबूर मां रामप्यारी को देखकर की जा सकती है, जो अपनी बेटियों को पढ़ाना तो चाहती है, परंतु पैसा न होने की वजह से वह हालात के हाथों मजबूर हो गई है।
जिला मुख्यालय से पैंसठ किलोमीटर दूर से मऊरानीपुर तहसील में ग्राम बुढ़ाई है। गांव की अधिकांश खेती की जमीन पास में बन रहे लखेरी बांध के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। रामप्यारी की दो बीघा जमीन भी अधिग्रहित कर ली गई थी। इसके एवज में उसे बयालीस हजार रुपये मुआवजा दिया गया था।
उसकी इस पैसे से पास के किसी गांव में जमीन खरीदने की योजना था, लेकिन इसी दरम्यान उसके पुत्र विनोद के सिर में गिरने से चोट लग गई। मुआवजे में मिली रकम इलाज में खत्म हो गई और कर्जा भी हो गया। 19 जनवरी 2017 को उसकी मौत हो गई। जवान पुत्र के सदमे से रामप्यारी का पति किशोरी लाल एकदम टूट गया और बीमार रहने लगा। मजदूरी अब उसके बस की नहीं रही।