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बेटियों की शिक्षा की राह का रोड़ा बन रही गरीबी

Wed, 22 Feb 2017 07:19 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, झांसी
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एक ओर ‘पढ़ें बेटियां - बढ़ें बेटियां’ के नारे के साथ सरकार महिला सशक्तिकरण का तानाबाना बुन रही है, तो वहीं गरीबी बेटियों की शिक्षा की राह का रोड़ा बनी हुई है। इसकी बानगी मऊरानीपुर के गांव बुढ़ाई में मजबूर मां रामप्यारी को देखकर की जा सकती है, जो अपनी बेटियों को पढ़ाना तो चाहती है, परंतु पैसा न होने की वजह से वह हालात के हाथों मजबूर हो गई है।
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जिला मुख्यालय से पैंसठ किलोमीटर दूर से मऊरानीपुर तहसील में ग्राम बुढ़ाई है। गांव की अधिकांश खेती की जमीन पास में बन रहे लखेरी बांध के लिए अधिग्रहित की जा चुकी है। रामप्यारी की दो बीघा जमीन भी अधिग्रहित कर ली गई थी। इसके एवज में उसे बयालीस हजार रुपये मुआवजा दिया गया था।

उसकी इस पैसे से पास के किसी गांव में जमीन खरीदने की योजना था, लेकिन इसी दरम्यान उसके पुत्र विनोद के सिर में गिरने से चोट लग गई। मुआवजे में मिली रकम इलाज में खत्म हो गई और कर्जा भी हो गया। 19 जनवरी 2017 को उसकी मौत हो गई। जवान पुत्र के सदमे से रामप्यारी का पति किशोरी लाल एकदम टूट गया और बीमार रहने लगा। मजदूरी अब उसके बस की नहीं रही।
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परिवार में आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा

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परिवार में आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा। रामप्यारी की पुत्री गीता और पिंकी की पढ़ाई छूट गई और वह मां के साथ मजदूरी में हाथ बंटा रही हैं। जबकि, छोटी बेटी छाया गांव के ही स्कूल में छठवीं कक्षा में पढ़ रही है, लेकिन मां और दोनों बहनों के मजदूरी पर जाने पर उसे घर का काम करना पड़ता है। ऐसे में उसकी पढ़ाई भी बाधित हो रही है।

रामप्यारी ने बताया कि लखेरी बांध के डूब क्षेत्र में होने की वजह से गांव में मनरेगा से कोई काम नहीं हो रहा है। ऐसे में मजदूरी भी रोज नहीं मिल पाती है। सप्ताह में मुश्किल से दो दिन ही काम मिलता है। वह बेटियों को पढ़ाना चाहती थी। शुरू से ही उसकी यह मंशा थी, लेकिन यहां खाने के लाले पड़े हैं।

उस पर लड़कियों की शादी भी करना है। ऐसे में पढ़ाई बहुत दूर की बात हो गई है। रामप्यारी ने बताया कि उसे सरकारी सहायता के नाम पर सिर्फ राशन ही मिलता है। इसके अलावा अन्य कोई सहायता उसे अब तक नहीं मिली है।
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