बचपन में बड़े भाई ने जिमनास्टिक में इस सपने के साथ ज्वाइन कराया था कि आगे इसी खेल में छोटा भाई नाम रोशन करेगा, लेकिन हालात उल्टे हो गए। आल इंडिया चैंपियनशिप खेल चुके सुमित कुमार को कोच और सहयोग न मिलने से उसने पढ़ाई छोड़ दी और खेल भी। सरकारी नौकरी नहीं मिली तो बीपीएड पढ़ने की ख्वाहिश जताई, लेकिन फीस सुनकर ही सुमित हिम्मत हार गया है।
यूपी के बरेली जिले में स्थित कालीबाड़ी के रहने वाले सुमित कुमार के पिता नारायण दास स्पेयर पार्ट्स की दुकान चलाते थे। दो साल पहले उनकी दुकान को ट्रांसपोर्ट नगर में शिफ्ट किया गया तो तंगी के चलते उन्होंने दुकान पर ताला डालना बेहतर समझा।
अब पिता फलों का ठेला लगाते हैं। सुमित ने कक्षा छह में पढ़ते हुए डोरी लाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में जिमनास्टिक सीखना शुरू किया था। यहां उस समय जिमनास्टिक के कोच तैनात थे।