सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त को होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)- पोस्ट ग्रेजुएट परीक्षा स्थगित करने की मांग करने वाली याचिका खारिज की। याचिका में परीक्षा को स्थगित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिकाकर्ताओं के वकील ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई ) न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ के समक्ष मामले को जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया था, जिसके बाद पीठ ने याचिका को सूचीबद्ध करने का फैसला किया था। याचिकाकर्ता विशाल सोरेन व अन्य ने अदालत से सभी अभ्यर्थियों के लिए एक समान और निष्पक्ष परीक्षण वातावरण सुनिश्चित करने के लिए परीक्षा को पुनर्निर्धारित करने और इसे एक ही बैच में आयोजित करने का निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। उन्होंने अदालत से परीक्षा केंद्र आवंटन के मुद्दों को सुधारने और यह सुनिश्चित करने की मांग की थी कि परीक्षा केंद्र नजदीकी स्थानों पर और अधिक न्यायसंगत व पारदर्शी तरीके से आवंटित किया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि परीक्षण शहरों का आवंटन 31 जुलाई को किया गया था।
याचिकाकर्ता ने इस बात की सराहना की कि किसी भी कदाचार को रोकने के लिए ऐसा किया गया है। हालांकि, इतने कम समय में परीक्षा देना बहुत अधिक मुश्किल हो गया है। छात्रों के लिए अपने विशिष्ट शहरों की यात्रा की व्यवस्था करना मुश्किल है। उनका कहना है कि दो लाख से अधिक छात्र परीक्षा में शामिल होने वाले हैं। परीक्षा 185 परीक्षण शहरों में आयोजित होने वाली है, जिसके परिणामस्वरूप ट्रेन टिकटों की अनुपलब्धता के साथ-साथ हवाई किराए में बढ़ोतरी हुई है।
इस कारण छात्रों के लिए अपने परीक्षा केंद्रों तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि तथ्य यह है कि परीक्षाएं दो बैचों में आयोजित की जाएंगी और सामान्यीकरण का फॉर्मूला उम्मीदवारों के लिए अज्ञात है। इस बात की आशंका है कि परीक्षार्थियों के एक बैच को दूसरे बैच की तुलना में कठिन प्रश्न पत्र मिल सकते हैं।