केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल में हवलदार अमित कुमार झा की खेलते वक्त तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें अस्पताल में ले जाया गया, लेकिन जान नहीं बचाई जा सकी। ये घटना 2016 की है। भूल के चलते जवान के शव का पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। नतीजा, फाइलों में ड्यूटी के दौरान मौत की जगह पर प्राकृतिक मौत लिख दिया गया। इस वजह से अमित झा के परिजनों को अनुग्रह राशि के अलावा अन्य दूसरे लाभों से वंचित होना पड़ा।
इनमें बैंक से अर्धसैनिक वेतन पैकेज (पीएमएसपी) अकाउंट के तहत मिलने वाले पैंशन फायदे भी शामिल थे। उसकी पत्नी चंचला ने सोशल मीडिया में अपनी आवाज उठाई। उनका वीडियो वायरल हुआ। पूर्व-अर्धसैनिक बल कल्याण संघ संस्था (कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वेलफेयर एसोसिएशन) के महासचिव रणबीर सिंह ने इस मुद्दे पर सीआरपीएफ डीजी से मुलाकात कर अमित झा के मामले को सुलझाने का आग्रह किया।
अब चार साल बाद सीआरपीएफ मुख्यालय ने यह मान लिया है कि अमित की मौत 'प्राकृतिक' नहीं, बल्कि ड्यूटी के दौरान हुई थी। उसके परिजनों को जो फायदे नहीं मिले थे, अब वे सभी लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
सीआरपीएफ मुख्यालय ने पूर्व-अर्धसैनिक बल कल्याण संघ को लिखे अपने पत्र में कहा है कि डेली मॉर्निंग मार्कर, ईवनिंग रोल कॉल और गेम पीरियड आदि कार्यों को सरकारी ड्यूटी का हिस्सा माना गया है। अगर इन कार्यों के दौरान किसी जवान या अधिकारी के साथ कोई हादसा या घटना होती है और उसमें कर्मी की मौत हो जाती है तो वह सब सरकारी ड्यूटी का हिस्सा माना जाएगा।
एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह बताते हैं कि इस मामले में अमित के परिजनों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है। हवलदार अमित कुमार झा 129वीं बटालियन, की वॉलीबॉल खेलने के दौरान की अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। उन्हें गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां उनकी मौत हो गई थी। दुखद बात यह है कि विभागीय भूल के चलते अमित के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।
इस कारण हवलदार की पत्नी को विभाग के द्वारा मिलने वाली अनुग्रह राशि व अन्य कई तरह की भलाई संबंधित योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ा। इनमें बैंक से पीएमएसपी अकाउंट के तहत मिलने वाले पेंशन फायदे भी शामिल हैं। महासचिव रणबीर सिंह ने अमित कुमार झा के मसले पर महानिदेशक डॉ. आनंद प्रकाश महेश्वरी से बातचीत की। डीजी ने इस मामले को तुरंत हल करने के आदेश जारी कर दिए। कमांडेंट 129वीं बटालियन और 5 सिग्नल बटालियन से बातचीत कर केस का समाधान किया गया। अब अमित को मौत के दौरान सरकारी ड्यूटी पर दिखाया गया है। उनकी पत्नी को विशेष आर्थिक मदद मिलेगी।