कोरोना संक्रमण की चपेट में आने और फिर स्वस्थ होने के बाद भी कई लोग पहले की तरह ठीक महसूस नहीं कर पा रहे हैं। किसी को नींद नहीं आ रही है तो किसी के मन में खौफ बैठा हुआ है। किसी को भूख नहीं लग रही तो किसी की बैठे-बैठे भी सांस फूलती है। ये सभी लक्षण पोस्ट कोविड से जुड़े हैं। दुनिया भर में अब तक 200 से ज्यादा लक्षणों की पहचान हो चुकी है जो सिर्फ कोरोना से स्वस्थ हुए व्यक्तियों में मिल रहे हैं।
गौर करने वाली बात है कि ये लक्षण कुछ सप्ताह नहीं बल्कि महीनों तक परेशान कर रहे हैं। द लैंसेंट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार दुनिया के 56 देशों में अब तक लंबी अवधि वाले पोस्ट कोविड-19 की पुष्टि हुई है जिसमें भारत भी शामिल है।
नई दिल्ली स्थित एम्स और मैक्स अस्पताल ने भी अलग अलग अध्ययन में यह पाया है कि कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्तियों में 10 से 12 महीने बाद भी कोई न कोई लक्षण मौजूद है। द लैंसेंट के ई क्लीनिकल मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में 56 देशों के 3,762 पोस्ट कोविड मामले लिए गए। चिकित्सीय तौर पर जब इनकी जानकारी एकत्रित की गई तो 203 लक्षण सामने आए हैं। इनमें से 66 लक्षण ऐसे हैं जो मरीजों में सात महीने बाद भी मिले हैं।
डॉक्टरों के अनुसार पोस्ट कोविड के तहत उन्हीं मरीजों में लंबे समय तक लक्षण मिल रहे हैं जिनकी संक्रमण के दौरान हालत गंभीर थी या फिर उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया था। मरीज के आत्मविश्वास और उचित देखभाल के जरिए ये कोरोना निगेटिव हो गए लेकिन स्वस्थ नहीं हुए। इनमें सबसे आम लक्षण थकान, व्यायाम के बाद अस्वस्थता (जहां लोगों का स्वास्थ्य शारीरिक या मानसिक परिश्रम के बाद बिगड़ जाता है) और मस्तिष्क में दर्द इत्यादि।
दिल्ली एम्स के डॉ. नवनीत विग ने भी मेडिकल जर्नल मेडरेक्सिव में प्रकाशित अध्ययन में इन लक्षणों की सबसे अधिक मौजूदगी की पुष्टि की थी। इसके अलावा अन्य प्रभावों में दृश्य मतिभ्रम, कंपकंपी, खुजली होना, मासिक धर्म चक्र में बदलाव, यौन रोग, दिल की धड़कन, मूत्राशय से जुड़ी परेशानी, दाद, कुछ भी याद न रहने की परेशानी, धुंधली दृष्टि, दस्त इत्यादि परेशानी भी देखने को मिल रही हैं।
डॉक्टरों के अनुसार इन लक्षणों के लिए चिकित्सीय सलाह और उपचार बेहद जरूरी है। इनकी वजह से लंबी अवधि तक दुष्प्रभाव रह सकते हैं जिनसे मरीज को काफी नुकसान हो सकता है।