करदाताओं के लिए उत्साहजनक बजट है, क्योंकि उन्हें आयकर दरों में मामूली बदलाव से फायदा मिल सकता है। अब सालाना तीन लाख रुपये तक आय पर कोई कर नहीं देना होगा। इसके बाद कर स्लैब में संशोधन किया गया है। इसका भी सीधा मतलब करदातों के हाथों में पैसे बचे रहने से है। यह उनके लिए अच्छा संकेत है। नई टैक्स व्यवस्था के तहत, वेतनभोगी कर्मचारी और पेंशनधारकों के लिए स्टैंडर्ड कटौती बढ़ाकर 75 हजार रुपये करने से कर योग्य आय कम हो जाएगी और टैक्स कम देना पड़ेगा। हालांकि इसका फायदा नई टैक्स व्यवस्था चुनने वालों को ही मिलेगा।
नई कर व्यवस्था में वेतनभोगी कर्मचारी टैक्स में हर माह करीब 1,458 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। समय के साथ नई कर व्यवस्था में अधिक करदाताओं के आने और नई व्यवस्था के फायदों के साथ पुरानी कर व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी। वित्त मंत्री ने अपने भाषण में आयकर अधिनियम की अच्छे तरीके से समीक्षा करने का वादा किया, ताकि इसे समझना आसान हो। इससे विवादों और मुकदमों की गुंजाइश कम हो जाएगी। इस प्रक्रिया के छह महीने में पूरी होने की उम्मीद है। यह कदम करदाताओं के लिए व्यवस्थित बदलाव लाएगा। इससे उनके लिए आयकर भुगतान सरल और सीधा हो जाएगा।
कुछ बदलाव निवेशकों को परेशान करने वाले
मोदी 3.0 के पहले पूर्ण बजट में कुछ कर प्रस्ताव खासकर निवेशकों के लिए मिलेजुले हैं। जैसे पूंजीगत फायदे पर कर को सरल बनाने की कोशिश सराहनीय है, लेकिन कर दरों में बदलाव कुछ निवेशकों को परेशान कर सकता है। उदाहरण के लिए, निर्दिष्ट वित्तीय परिसंपत्तियों पर अल्पकालिक लाभ पर भी अब 15 के बजाय 20 फीसदी कर देना होगा। दूसरी ओर, सभी वित्तीय और गैर-वित्तीय परिसंपत्तियों पर दीर्घकालिक लाभ पर 12.5 फीसदी तक की कर दर होगी। यह वर्तमान 10 फीसदी है।
असर को समझें और बुद्धिमानी से लगाएं अपना पैसा
कुछ सूचीबद्ध वित्तीय परिसंपत्तियों पर पूंजीगत लाभ की छूट की सीमा को एक लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख रुपये सालाना करने का प्रस्ताव है। इसलिए, निवेशकों को निवेश करते वक्त करों के असर को समझते हुए बुद्धिमानी से वित्तीय साधनों का चयन करना चाहिए। उन्हें निवेश से मिलने वाले रिटर्न पर करों के प्रभाव को भी ध्यान में रखना चाहिए, ताकि निवेश से होने वाले लाभ का अनुमान लगाते वक्त उन्हें कोई हैरानी न हो। कुल मिलाकर इस बजट से करदाताओं को निराश होने की कोई बात नहीं है।