भारत में प्रदूषण की समस्या अपने पैर जमा चुकी है। खासकर राजधानी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि आम लोगों को श्वास लेने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर में लगातार वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थिति बनी हुई है। तापमान में गिरावट और हवाओं की गति मंद पड़ने और वायुमंडलीय मिश्रित परत के सतह के करीब आ जाने से प्रदूषक तत्वों को फैलने का मौका नहीं मिल रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार दिल्ली ने ज्यादा प्रदूषण झेला है। हालांकि अब धीरे-धीरे इसकी स्थिति में सुधार देखा जा रहा है।
दिल्ली क्यों बाकी मेट्रो शहरों से ज्यादा प्रदूषित है?
स्थानीय प्रदूषण स्रोतों पर रोक हटाए जाने के बाद से दिल्ली-एनसीआर की हवा में प्रदूषण का स्तर खराब से बहुत खराब श्रेणी के बीच ही बना हुआ है। केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर जल्द ही दिल्ली में बारिश नहीं हुई तो हालात और भी ज्यादा खराब हो सकते हैं। अन्य मेट्रो शहरों से राजधानी दिल्ली में ज्यादा पल्यूशन होने के लिए कई वजहें उत्तरदायी हैं...
- इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण सड़कों पर उड़ने वाली धूल से हो रहा है।
- दिल्ली की सड़कों पर अन्य शहरों से ट्रैफिक का ज्यादा होना ।
- फैक्ट्रियों से निकल रहा धुआं।
- दिल्ली के अंदर आने वाले ट्रकों से निकला हुआ धुआं ।
- दिल्ली के आस-पास के इलाकों में जलाई जाने वाली पराली से निकलने वाले धुएं से प्रदूषण के स्तर में बढोतरी होती है।
- दिल्ली में नियमों को ताक पर रखकर लगातार चल रहे निर्माण कार्य से पैदा होने वाली धूल भी इसके लिए जिम्मेदार है।
- टूटी सड़कों की वजह से पल्यूशन बढ़ रहा है।
- विकास की दौड़ में जितने पेड़ काटे गए हैं उसकी तुलना में लगाए बहुत कम गए हैं।