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पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति: डीपीसीसी ने 13 सीईटीपी को जारी किया नोटिस, 2.05 करोड़ रुपये का लगाया जुर्माना

Wed, 07 Apr 2021 11:41 PM IST
देव कश्यप डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) के निर्देशों के बावजूद सीईटीपी द्वारा निर्धारित मानकों का पालन नहीं किये जाने का आरोप, लगाया भारी जुर्माना 
  • अरविंद केजरीवाल सरकार 2023 तक यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध
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यमुना में फैला प्रदूषण - फोटो : ANI
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विस्तार
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यमुना में प्रदूषण के लिए इनमें गिरने वाले नालों को सबसे ज्यादा जिम्मेदार माना जाता है। यही कारण है कि यमुना को 2023 तक स्वच्छ करने के लक्ष्य को पाने के लिए नालों के जल को यमुना में गिरने से रोकने के लिए तमाम योजनाएं बनाई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कई स्तरों पर लापरवाही हो रही है। इस लापरवाही के प्रति डीपीसीसी ने कड़ा रवैया अपनाया है और ऐसे 13 संस्थानों पर भारी जुर्माना लगाया है जो बिना शोधित जल को यमुना में डाल रही हैं।    

 

दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने 13 सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) को नोटिस जारी किया है। साथ ही पर्यावरण को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए इन पर कुल 12.05 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। सीईटीपी के काम को तय मानकों के मुताबिक नहीं पाया गया। दिल्ली सरकार ने जांच में पाया है कि सीईटीपी ठीक से काम नहीं करते हैं जिसकी वजह से यमुना बड़े पैमाने पर प्रदूषित हो रही है।

  

इस समय की क्षमता

दिल्ली में इस समय 212.3 एमएलडी क्षमता के 13 सीईटीपी चालू हैं। वजीरपुर, मायापुरी, बवाना, नरेला, एसएमए, जीटीके, ओखला, मंगोलपुरी,  नांगलोई, बादली, झिलमिल, लॉरेंस रोड और नारायणा में 13 सीईटीपी का निर्माण 17 औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधित करने के लिए किया गया है। इनमें से 11 सीईटीपी का संचालन संबंधित सोसायटी द्वारा किया जा रहा है। नरेला और बवाना सीईटीपी का संचालन पीएनसी दिल्ली और बवाना इंफ्रा डेवलपमेंट की ओर से किया जा रहा है। इन्हें डीएसआईआईडीसी की ओर से लगाया गया है।

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