देश में मानसून का आगमन हो चुका है। कई राज्यों में बारिश शुरू हो गई है और कई राज्यों को अभी इसका इंतजार है। हालात कुछ इस तरह के बने हैं कि एक तरफ भारी बारिश और जलभराव से मुंबई परेशान है, तो दूसरे कई शहर बारिश को तरस रहे हैं। देश में वर्षा के असमान वितरण का असर पानी की कमी के रूप में सामने आ रहा है। पर्यावरण में आए बदलाव का असर ऐसा है कि एक ही शहर के किसी क्षेत्र में अतिवर्षा हो रही है तो कहीं गर्मी और सूखे जैसे हालात हैं। इसका असर जल प्रदूषण और जलसंकट के रूप में दिखाई दे रहा है।
केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार देश का 70 फीसदी पानी प्रदूषित है। रिपोर्ट बताती है कि देश जलसंकट के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। उत्तरी हिमालय क्षेत्र से लेकर तटीय इलाकों तक करीब 60 करोड़ (लगभग आधी आबादी) पानी की कमी से जूझ रही है। हर साल प्रदूषित पानी की वजह से 2 लाख लोगों की जान जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 70 फीसदी पानी प्रदूषित है, जिसका मतलब है कि हर चार में से तीसरा भारतीय गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। हमारे देश में गंदे पानी को साफ न कर पाना भी एक बड़ी समस्या है। गंदे पानी का सिर्फ एक तिहाई हिस्सा साफ किया जाता है और बाकी नदी या तालाब में गिरा दिया जाता है। इससे भूजल भी प्रदूषित होता है। रिपोर्ट के मुताबिक नदियों का पानी प्रदूषित है, भूजल और नल का पानी भी गंदा हो चुका है। इसकी बड़ी वजह कचरे का कुप्रबंधन भी है। दरअसल ठोस कचरे को साफ करने के लिए हमारे देश में अब तक कोई व्यवस्था नहीं है। जिसकी वजह से भूजल प्रदूषित और जहरीला हो रहा है।
नीति आयोग की एक रिपोर्ट का दावा है कि अगर भारत में पानी की समस्या को सुलझा लिया गया तो इससे देश की जीडीपी को 6 फीसदी का फायदा होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक हमारी इंडस्ट्री खाद्य सुरक्षा सबकुछ पानी से जुड़ी हुई है। पानी कोई असीमित स्रोत नहीं है और एक दिन यह खत्म हो सकता है। वर्ष 2030 तक भारत में पानी की सप्लाई मांग के मुकाबले आधी रह जाएगी। फिलहाल इस बड़ी समस्या से निजात पाने के लिए केंद्र सरकार सभी राज्य सरकारों से कह चुकी है कि वे पानी को साफ करने की योजना को प्राथमिकता दी जाए, जिससे पानी की मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन बनाया जा सके।
भारत की सबसे बड़ी और पवित्र कही जाने वाली गंगा दुनिया की सबसे गंदी नदियों में से एक है। उत्तर भारत की यमुना, पश्चिम की साबरमती, दक्षिण की पंबा की भी हालत बहुत ही खराब है। कई नदियां जैविक लिहाज से मर चुकी हैं। इसका असर पर्यावरण के साथ लोगों पर भी पड़ रहा है। वर्ल्ड रिसोर्सेज रिपोर्ट के मुताबिक 70 फीसदी भारतीय गंदा पानी पीते हैं। पीलिया, हैजा, टायफाइड और मलेरिया जैसी कई बीमारियां गंदे पानी की वजह से होती हैं। रसायनिक खाद भी भूजल को दूषित कर रही है। कारखानों और उद्योग की वजह से हालत और बुरी हो गई है।