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Politics: राघव चड्ढा के इस्तीफे से आम आदमी पार्टी में सियासी भूचाल, क्या पंजाब तक जाएगी हमले की गूंज?

Sat, 25 Apr 2026 04:26 AM IST
Nirmal Kant ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

Politics: राघव चड्ढा की बगावत ने आम आदमी पार्टी में  बड़ा सियासी संकट खड़ा कर दिया है, जिससे पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठ रहे हैं। पार्टी के कई बड़े नेताओं के अलग होने से संगठन कमजोर दिख रहा है और इसका असर पंजाब तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। पढ़िए रिपोर्ट-
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राघव चड्ढा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अरविंद केजरीवाल अपने पुराने और विश्वस्त साथी राघव चड्ढा के तेवर व तौर तरीकों से तो अच्छी तरह वाकिफ रहे होंगे। पर घायल राघव ने उन्हें करारा सियासी जख्म देकर जता दिया कि वह राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी हैं। आप के तमाम बड़े-बड़े दिग्ग्जों ने पार्टी से किनारा कर लिया।
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खुद अरविंद केजरीवाल कई तरह के सियासी संकटों से गुजर चुके हैं, लेकिन इस बगावत ने आम आदमी पार्टी (आप) को अंदर से हिला सा दिया है।  क्या वह इससे राष्ट्रीय राजनीति में बैकफुट पर आ सकते हैं। पर बड़ा सवाल यह कि क्या राघव चड्ढा के हमले की गूंंज पंजाब तक जाएगी जहां आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही है। राघव और संदीप पंजाब में आप की जीत के शिल्पकार रहे हैं। आप के चुनाव निशान की बात करें तो झाडू खुल चुकी है। कुछ ही रोज पहले की तो बात है। जब अचानक  केजरीवाल ने चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाया तो उन्होंने पलटवार करने में देर नहीं लगाई। बोले, घायल हूं इसलिए घातक हूं। मेरी चुप्पी को मेरी खामोशी मत समझ लेना। हाल में पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा वापस ले ली थी, पर दिल्ली सरकार ने उन्हें अपनी ओर से सुरक्षा दे दी। इस बगावत में स्वाति मालीवाल की भूमिका भी अहम मानी जा रही। उनकी केजरीवाल से पहले से ठन गई थी। माना जा रहा है कि उन्होंने भी इस बगावत को अंजाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। 

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राज्य में हतोत्साहित हो सकते हैं आप कार्यकर्ता
आप में यह बगावत पंजाब में उसकी सरकार तक पहुंचेगी। यह सवाल अब और अहम हो गया है। पंजाब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ यह घटनाक्रम आप के लिए एक राजनीतिक भूकंप की तरह माना जा रहा है। संदीप पाठक आप के संगठन की रीढ़ माने जाते थे। उनका जाना पंजाब के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित कर सकता है। हरभजन और विक्रम साहनी जैसे चेहरों के जाने से पार्टी की साख को धक्का लगा है।
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भाजपा के लिए नया मौका...
पंजाब में अब तक हाशिए पर रही भाजपा इन चेहरों के दम पर राज्य में एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरने की कोशिश करेगी, जिससे मुकाबला अब त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय हो सकता है।

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