उन्होंने एक दिन का जनता कर्फ्यू मांगा और ताली-थाली बजाने का आह्वान किया। पूरे देश ने उसे माना। फिर उन्होंने जनता से लॉकडाउन के 21 दिन मांगे और लोग शांति से अपने घरों में हैं। अब पांच अप्रैल को रात नौ बजे घरों की बत्तियां बुझाकर दिया जलाने की मोदी जी की अपील को भी देश ने हाथों हाथ लिया है। इसी तरह कोरोना से लड़ने के लिए आथिर्क संकट न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री ने एक अलग कोष पीएम केयर्स बनाया, जिसमें देखते देखते कई हजार करोड़ रुपये का योगदान आ गया। ये सारी उपलब्धियां विपक्ष के हर हमले को कुंद कर देंगी।
विपक्ष ने अपनी जो रणनीति बनाई है उसके मुताबिक वो पुरानी गलतियां नहीं दोहराएगा। अभी कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल यहां तक कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार, केरल की वाम मोर्चा सरकार और प.बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार और कांग्रेस शासित सभी राज्य कोरोना से लड़ने में केंद्र सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं। ये राज्य भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं। विपक्षी दलों की रणनीति है कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार जो भी फैसले ले रही है, उसका सहयोग और समर्थन किया जाए। इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी नेताओं ने लॉकडाउन के समर्थन में बयान दिया। शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता ने तो ताली-थाली पीटने में भी सहयोग दिया।
लेकिन विपक्षी दलों की यह शांति और समर्थन तूफान से पहले की शांति है। कांग्रेस के युवा नेता और पूर्व सचिव प्रकाश जोशी कहते हैं कि हम कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार को पूरा सहयोग दे रहे हैं, लेकिन हमारे कुछ ज्वलंत सवाल हैं जो इस लड़ाई से जुड़े हैं, वक्त आने पर हम उन्हें जरूर उठाएंगे। कांग्रेस के शुरुआती समर्थन और सहयोग की घोषणा के बाद अब राहुल गांधी ने अपने ट्वीट के जरिए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार की कमियों को उजागर करना शुरू कर दिया है। आज अपने ट्वीट में राहुल ने कोरोना से निबटने में सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है। राहुल ने लिखा है कि भारत कोरोना से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए पर्याप्त जांच नहीं कर रहा है। प्रधानमंत्री के ताली बजाने और दिया जलाने के आह्वान पर तंज कसते हुए राहुल न लिखा है कि सिर्फ लोगों से ताली बजवाने और आसमान में दीया जलाने से समस्या हल नहीं होगी।
कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी की अपील पर हम दिया जरूर जलाएंगे अगर इससे सभी डाक्टरों, नर्सों और पैरा मेडिकल स्टाफ को, जो कोरोना संक्रमण के मरीजों के इलाज में जुटे हैं, आवश्यक पीपीई किट मिल जाए, अगर इससे जितनी जरूरत है, उसके मुताबिक वेंटीलेटर, मास्क और जांच किट उपलब्ध हो जाएं, अगर गरीब दिहाड़ी मजदूरों के बैंक खातों में जरूरी रकम पहुंच जाए, अगर किसानों को रबी की फसल की कटाई के लिए जरूरी धन और मजदूर मिल जाएं।
एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने नाम की गोपनीयता की शर्त पर कहा कि अभी संकटकाल है इसलिए हम सरकार के लिए कोई समस्या नहीं पैदा करना चाहते हैं। लेकिन समय आने पर हम संसद से लेकर सड़क तक पूछेंगे कि जब 30 जनवरी को देश में कोरोना का पहला मामला सामने आया और 31 जनवरी से राहुल गांधी ने लगातार ट्वीट करके सरकार का ध्यान इस संकट की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल जरूरी कदम उठाने की मांग की, तब सरकार न सिर्फ निष्क्रिय रही बल्कि स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने तो बाकायदा कहा कि भारत में किसी तरह की मेडिकल आपात स्थिति का खतरा नहीं है। इस नेता ने कहा कि हम यह सवाल भी उठाएंगे कि बार-बार चेताने के बावजूद 19 मार्च तक क्यों देश से वेंटीलेटरों और दूसरे उपकरणों का निर्यात होता रहा।
कांग्रेस कार्यसमिति के पूर्व सदस्य रहे इस नेता के मुताबिक अगर तब ही सरकार चेत जाती और सभी जरूरी तैयारियां कर लेती तो न देशव्यापी स्तर पर लॉकडाउन की नौबत आती और न ही कोरोना इतने व्यापक रूप से भारत में फैलता। आम आदमी पार्टी के सांसद और नेता संजय सिंह का कहना है कि अभी उनकी पार्टी और दिल्ली सरकार का एकमात्र लक्ष्य और ध्यान कोरोना संकट से निबटने और सरकार को इस लड़ाई में पूरा सहयोग देने पर है।