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कुरुक्षेत्र: कोरोना संकट का शुरुआती सहयोग बदल सकता है सियासी महाभारत में

Sat, 04 Apr 2020 09:48 PM IST
Amit Mandal विनोद अग्निहोत्री
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राहुल गांधी-नरेंद्र मोदी
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कोरोना संक्रमण से जूझ रहे देश में शुरुआत में बनी सियासी एकता की जगह अब धीरे-धीरे राजनीतिक महाभारत की तैयारी ले रही है। प्रकट तौर पर पूरा देश, हर राज्य सरकार और राजनीतिक दल कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है। लेकिन जैसे ही इस संकट के बादल छंटेंगे, सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कोरोना के मुद्दे पर जबर्दस्त घमासान होगा। दोनों ही तरफ इसकी तैयारी हो रही है या यूं कहें कि इसके संकेत मिलने लगे हैं। 

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प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार से सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं, तो सत्ता पक्ष कोरोना से लड़ने में सरकार की तैयारियों और तत्परता के कवच से मुकाबले के लिए मैदान में है। पूर्व केंद्रीय मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर के मुताबिक कोरोना से लड़ने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी सरकार जिस तत्परता और मुस्तैदी से हर मोर्चे पर काम कर रही है, उसकी तारीफ सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया में हो रही है। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस मीडिया विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट के जरिए सरकार से वेंटीलेटरों, सैनिटाइजर और मॉस्क के 19 और 24 मार्च तक निर्यात किए जाने पर सवाल पूछा है।

कोरोना को लेकर भाजपा और कांग्रेस के अपने अपने पैंतरे हैं। कांग्रेस नेताओं में पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और कपिल सिब्बल ने प्रधानमंत्री मोदी की पांच अप्रैल को अपने अपने घरों की बत्तियां बुझाकर एक-एक दीया या मोमबत्ती जलाने की अपील पर सवाल दागते हुए तंज किया है। वहीं, भाजपा नेताओं का मानना है कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहले जनता कर्फ्यू और फिर राष्ट्रीय स्तर पर लॉकडाउन करके कोरोना संक्रमण के विरुद्ध भारत की लड़ाई को तेज किया है, उसके नतीजे अप्रैल के आखिर तक बेहद सकारात्मक आने की उम्मीद है। तब तक भारत कोरोना संक्रमण को उम्मीद है कि काबू में कर लेगा। 
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भाजपा नेता सुधांशु मित्तल का कहना है कि जिस तरह देश की जनता एकमत होकर प्रधानमंत्री मोदी की हर अपील को मानकर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार का साथ दे रही है, उससे भारत यह लड़ाई जरूर जीतेगा। मित्तल के मुताबिक एक तरफ चीन, अमेरिका, इटली, सिंगापुर, इंग्लैंड, जर्मनी जैसे देशों में कोरोना ने जो कहर ढाया है, उसके मुकाबले भारत में भले ही यह संक्रमण आ तो गया लेकिन जिस तरह केंद्र सरकार ने समय रहते सभी जरूरी कदम उठाए हैं और पूरे देश को इसके खिलाफ तैयार कर दिया है, वह दुनिया के लिए एक मिसाल है। मित्तल कहते हैं कि सरकार और भाजपा कोरोना को लेकर कोई राजनीति नहीं कर रही है और न करेगी लेकिन अगर विपक्ष ने अनर्गल आरोप लगाए तो हम जवाब देने में पीछे भी नहीं हटेंगे।

भाजपा नेताओं को पूरी उम्मीद है कि अगर मध्य मई तक कोरोना पर काबू पा लिया गया तो मोदी सरकार की दूसरी पारी का एक साल पूरा होने के जश्न की ये सबसे शानदार उपलब्धि होगी। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि संकट को अवसर में बदलना कोई मोदी जी से सीखे। जिस तरह कोरोना संकट पूरी दुनिया पर आया है लेकिन उसे भारत में मोदी जी ने जिस तरह बखूबी हैंडल किया है, उससे जनता में एक बार फिर यह धारणा पक्की हो गई है कि नरेंद्र मोदी से बेहतर कोई दूसरा नेता इस समय देश में नहीं है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने जनता से जो भी मांगा, लोगों ने सहर्ष दिया। 
 

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पुरानी गलतियां नहीं दोहराएगा विपक्ष

उन्होंने एक दिन का जनता कर्फ्यू मांगा और ताली-थाली बजाने का आह्वान किया। पूरे देश ने उसे माना। फिर उन्होंने जनता से लॉकडाउन के 21 दिन मांगे और लोग शांति से अपने घरों में हैं। अब पांच अप्रैल को रात नौ बजे घरों की बत्तियां बुझाकर दिया जलाने की मोदी जी की अपील को भी देश ने हाथों हाथ लिया है। इसी तरह कोरोना से लड़ने के लिए आथिर्क संकट न हो, इसके लिए प्रधानमंत्री ने एक अलग कोष पीएम केयर्स बनाया, जिसमें देखते देखते कई हजार करोड़ रुपये का योगदान आ गया। ये सारी उपलब्धियां विपक्ष के हर हमले को कुंद कर देंगी।

विपक्ष ने अपनी जो रणनीति बनाई है उसके मुताबिक वो पुरानी गलतियां नहीं दोहराएगा। अभी कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल यहां तक कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार, केरल की वाम मोर्चा सरकार और प.बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार और कांग्रेस शासित सभी राज्य कोरोना से लड़ने में केंद्र सरकार के साथ सहयोग कर रहे हैं। ये राज्य भाजपा शासित राज्यों की तुलना में कोरोना के खिलाफ लड़ाई में किसी भी मामले में पीछे नहीं हैं। विपक्षी दलों की रणनीति है कोरोना के खिलाफ लड़ाई में केंद्र सरकार जो भी फैसले ले रही है, उसका सहयोग और समर्थन किया जाए। इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत सभी विपक्षी नेताओं ने लॉकडाउन के समर्थन में बयान दिया। शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता ने तो ताली-थाली पीटने में भी सहयोग दिया।

लेकिन विपक्षी दलों की यह शांति और समर्थन तूफान से पहले की शांति है। कांग्रेस के युवा नेता और पूर्व सचिव प्रकाश जोशी कहते हैं कि हम कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार को पूरा सहयोग दे रहे हैं, लेकिन हमारे कुछ ज्वलंत सवाल हैं जो इस लड़ाई से जुड़े हैं, वक्त आने पर हम उन्हें जरूर उठाएंगे। कांग्रेस के शुरुआती समर्थन और सहयोग की घोषणा के बाद अब राहुल गांधी ने अपने ट्वीट के जरिए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में सरकार की कमियों को उजागर करना शुरू कर दिया है। आज अपने ट्वीट में राहुल ने कोरोना से निबटने में सरकार के प्रयासों को नाकाफी बताया है। राहुल ने लिखा है कि भारत कोरोना से प्रभावी तरीके से लड़ने के लिए पर्याप्त जांच नहीं कर रहा है। प्रधानमंत्री के ताली बजाने और दिया जलाने के आह्वान पर तंज कसते हुए राहुल न लिखा है कि सिर्फ लोगों से ताली बजवाने और आसमान में दीया जलाने से समस्या हल नहीं होगी।

कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ कहते हैं कि प्रधानमंत्री जी की अपील पर हम दिया जरूर जलाएंगे अगर इससे सभी डाक्टरों, नर्सों और पैरा मेडिकल स्टाफ को, जो कोरोना संक्रमण के मरीजों के इलाज में जुटे हैं, आवश्यक पीपीई किट मिल जाए, अगर इससे जितनी जरूरत है, उसके मुताबिक वेंटीलेटर, मास्क और जांच किट उपलब्ध हो जाएं, अगर गरीब दिहाड़ी मजदूरों के बैंक खातों में जरूरी रकम पहुंच जाए, अगर किसानों को रबी की फसल की कटाई के लिए जरूरी धन और मजदूर मिल जाएं।

एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने नाम की गोपनीयता की शर्त पर कहा कि अभी संकटकाल है इसलिए हम सरकार के लिए कोई समस्या नहीं पैदा करना चाहते हैं। लेकिन समय आने पर हम संसद से लेकर सड़क तक पूछेंगे कि जब 30 जनवरी को देश में कोरोना का पहला मामला सामने आया और 31 जनवरी से राहुल गांधी ने लगातार ट्वीट करके सरकार का ध्यान इस संकट की ओर आकर्षित करते हुए तत्काल जरूरी कदम उठाने की मांग की, तब सरकार न सिर्फ निष्क्रिय रही बल्कि स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने तो बाकायदा कहा कि भारत में किसी तरह की मेडिकल आपात स्थिति का खतरा नहीं है। इस नेता ने कहा कि हम यह सवाल भी उठाएंगे कि बार-बार चेताने के बावजूद 19 मार्च तक क्यों देश से वेंटीलेटरों और दूसरे उपकरणों का निर्यात होता रहा।

कांग्रेस कार्यसमिति के पूर्व सदस्य रहे इस नेता के मुताबिक अगर तब ही सरकार चेत जाती और सभी जरूरी तैयारियां कर लेती तो न देशव्यापी स्तर पर लॉकडाउन की नौबत आती और न ही कोरोना इतने व्यापक रूप से भारत में फैलता। आम आदमी पार्टी के सांसद और नेता संजय सिंह का कहना है कि अभी उनकी पार्टी और दिल्ली सरकार का एकमात्र लक्ष्य और ध्यान कोरोना संकट से निबटने और सरकार को इस लड़ाई में पूरा सहयोग देने पर है।
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