सार्वजनिक क्षेत्र के ठेकों में हिस्सेदारी को लेकर सियासत तेज हो गई है। भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए उसे दलित विरोधी करार दिया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में आरोप लगाया कि बड़े सरकारी ठेकों में बहुजन उद्यमियों को सिस्टमेटिक तरीके से बाहर रखा जा रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले साल दिए गए 16,500 करोड़ रुपये के सार्वजनिक कार्यों के ठेकों में दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदाय से जुड़े कारोबारों को कितना हिस्सा मिला।
कांग्रेस की लंबे समय से रही है दलित विरोधी मानसिक्ता
राहुल गांधी के इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पर पलटवार किया। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केशवन ने कहा कि कांग्रेस की लंबे समय से दलित विरोधी मानसिकता रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू से लेकर राहुल गांधी तक, कांग्रेस नेतृत्व ने दलित समुदाय की गरिमा का सम्मान नहीं किया।
मल्लिकार्जुन खरगे का क्यों किया जिक्र?
केसवन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार उन्होंने खुद यह कहा है कि अंतिम निर्णय उनके हाथ में नहीं, बल्कि पार्टी के हाईकमान के पास होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस में अध्यक्ष का पद केवल औपचारिक बनकर रह गया है।
उन्होंने आगे कहा कि प्रियंका गांधी के नामांकन के दौरान खरगे के साथ किया गया व्यवहार भी पार्टी की कार्यशैली को दिखाता है। केसवन ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने डॉ. बीआर आंबेडकर को भारत रत्न नहीं दिया।
वहीं, बिहार के मंत्री दीलीप जयसवाल ने भी राहुल गांधी के बयान की आलोचना करते हुए कहा कि उन्हें अपने पूर्वजों जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी से पूछना चाहिए कि पिछड़े वर्गों को उनके अधिकार क्यों नहीं दिए गए।