एससी-एसटी आरक्षण में उप-वर्गीकरण और क्रीमीलेयर तय करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सियासत धीरे-धीरे गर्म हो रही है। इस फैसले पर जहां दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और भाजपा से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, वहीं विभिन्न दलों के दलित नेताओं की राय बंटी हुई है। बसपा प्रमुख मायावती और लोजपा आर प्रमुख चिराग पासवान ने इस फैसले की तीखी आलोचना की है, जबकि आरपीआई प्रमुख और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने क्रीमीलेयर का विरोध और वर्गीकरण का समर्थन किया है। हम के मुखिया जीतनराम मांझी फिलहाल फैसले पर चुप हैं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का कांग्रेस शासित दो राज्यों तेलंगाना और कर्नाटक ने स्वागत किया है। तेलंगाना सरकार ने तो इस फैसले को सबसे पहले अपने राज्य में लागू करने की घोषणा भी कर दी है। दूसरी ओर पार्टी की वरिष्ठ नेता मीरा कुमार ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का विरोध किया है। दलित नेता और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और उनकी पार्टी की ओर से इस बारे में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पार्टी ने कहा है कि फैसले के विस्तृत अध्ययन के बाद बयान जारी किया जाएगा। दूसरी ओर आरपीआई प्रमुख रामदास आठवले ने जाति वर्गीकरण का समर्थन किया और कहा कि इससे एससी-एसटी वर्ग के सभी जातियों को लाभ मिलेगा। हालांकि उन्होंने क्रीमीलेयर का विरोध किया।
पुनर्विचार करे सुप्रीम कोर्ट : मायावती
बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सुप्रीम कोर्ट से एससी-एसटी आरक्षण में वर्गीकरण के फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की है। साथ ही, केंद्र सरकार से वर्तमान संसद सत्र में आरक्षण को बचाने के लिए संविधान में संशोधन करने तथा उसे संविधान की नौवीं सूची में शामिल करने की मांग की। हालांकि क्रीमीलेयर को आरक्षण मिलने पर सफाई दी कि एससी-एसटी को लोग अब भी दूसरे नजरिए से देखते हैं। चिराग पासवान ने भी इस फैसले का विरोध करते हुए इसे बड़ी बेंच में चुनौती देने की घोषणा की है। लोजपा के सूत्रों का कहना है कि चिराग जल्द इस मामले को राजग की बैठक में रखेंगे।