भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने उनके आरोपों की पोल खोल दी है। यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को वैध और संवैधानिक करार दिया। पार्टी सांसद और प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि आज सर्वोच्च न्यायालय ने एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को पूर्णतः संविधान सम्मत घोषित कर दिया है। बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में राजनीतिक दृष्टि से करारी हार मिलने के बाद, अनर्गल बयानों और अफवाहों के बावजूद जनता से किसी भी प्रकार का समर्थन न मिलने के पश्चात मुझे लगता है कि अब विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी, नैतिक और संवैधानिक दोनों मोर्चों पर भी पूरी तरह पराजित हो चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मतदाता सूची का यह विशेष पुनरीक्षण स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक आवश्यकता को मजबूत करता है। अदालत ने माना कि चुनाव आयोग को इस तरह की प्रक्रिया चलाने का अधिकार है।
फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी बेनकाब हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक घोषित कर दिया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी शुरू से ही इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे क्योंकि कांग्रेस अवैध मतदाताओं के साथ खड़ी थी। भाजपा ने दावा किया कि अदालत के फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव आयोग की कार्रवाई पूरी तरह संवैधानिक दायरे में है और कांग्रेस दुष्प्रचार फैला रही है।
वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता नलिन कोहली ने कहा कि चुनाव आयोग समय-समय पर मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन रखने के लिए इस तरह की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया चलाता है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की मूल आवश्यकता है और चुनाव आयोग इसी संवैधानिक जिम्मेदारी को निभा रहा है।
नलिन कोहली ने कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के तहत भारत में चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई है। मतदाता सूची को सही रखना और चुनावों को निष्पक्ष बनाना उसकी संवैधानिक भूमिका है। उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव आयोग पर हमला करना बंद करेंगे और लोकतंत्र पर अनावश्यक सवाल नहीं उठाएंगे।
सामाजिक कार्यकर्ता और चुनाव विश्लेषक योगेंद्र यादव ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असली खबर यह नहीं है कि अदालत ने SIR को संवैधानिक माना है, बल्कि यह है कि अब देश में यह तय करने का अधिकार कि कौन वोट देगा और कौन नहीं, सत्तारूढ़ भाजपा के हाथों में चला जाएगा।
इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कई सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने एसआईआर की सांविधानिक वैधता को मान तो लिया है, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने जितने जवाब दिए हैं, उतने ही प्रश्न भी खड़े कर दिए हैं। सिंघवी ने कहा, फैसले के पैरा 97 से लेकर पैरा 101 तक पढ़ा जाए तो समझ आएगा कि चुनाव आयोग की तरफ से कराए जा रहे एसआईआर की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। इसमें सुधार सिर्फ इसलिए आया, क्योंकि कई राजनीतिक दल और एनजीओ की तरफ से कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी गई।
कांग्रेस ने कहा है कि अदालत ने साफ किया है कि नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार चुनाव आयोग के पास नहीं है। यह अधिकार नागरिकता कानून के तहत गृह मंत्रालय जैसी सक्षम संस्था के पास होता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि चुनाव आयोग इस मामले को केवल प्रशासनिक स्तर पर देख सकता है। फैसले में यह भी कहा गया है कि जब नागरिकता से जुड़ा कोई सवाल उठे, तो चुनाव आयोग को उसे गृह मंत्रालय जैसी संबंधित संस्था को भेजना होगा, और उस संस्था का निर्णय मान्य होगा। अगर ऐसा है, तो सवाल उठता है किदेश के कई राज्यों में 7.5 करोड़ लोगों को नागरिकता का निर्णय लेने से पहले कैसे हटाया गया? इन करोड़ों लोगों का मताधिकार एक ऐसी संस्था द्वारा कैसे छीन लिया गया, जिसे ये अधिकार ही नहीं है?
वहीं, टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा कि उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है, क्योंकि अदालत का फैसला ही कानून होता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस ने कभी SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा, बल्कि उसके कथित दुरुपयोग पर सवाल उठाए थे।
सौगत रॉय ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया सही तरीके से नहीं कराई गई, जिसके चलते करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उनकी पार्टी का रुख नहीं बदलेगा और वह मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाती रहेगी।