कांग्रेस की एकला चलो की रणनीति चारों खाने चित हो गई। कांग्रेस के लिए तुरुप का पत्ता मानी जाने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा के जरिए यूपी में जीत का भरोसे से अतिउत्साहित कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी है। 21 राज्यों में कांग्रेस पूरी तरह साफ हो गई है। मोदी-शाह की जोड़ी को हलके में लेना करीब 135 वर्ष पुरानी पार्टी को बेहद भारी पड़ा है। एक बार फिर कांग्रेस के समक्ष लोकसभा में विपक्षी पार्टी का दर्जा मिलना मुश्किल हो गया है। कांग्रेस की सामने आगे कुआं पीछे खाई वाली स्थिति हो गई है।
इस चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन को देखकर कहा जा सकता है कि वह वोटकटवा पार्टी बन गई है। बीच चुनाव में प्रियंका का वोटकटवा वाला बयान भी अब यही साबित कर रहा है। रोड शो और सभाओं में प्रियंका के लिए भीड़ तो जुटती थी लेकिन वह वोट में तब्दील नहीं हो सकी। वह यूपी में भी खूब घूमीं और दूसरे राज्यों में भी गईं लेकिन जिन 44 लोकसभा सीटों पर उन्होंने भीड़ जुटाई, उनमें से छह सीटें ही वोट में बदलती दिखीं।