राफेल विमानों के सौदे पर सरकार की ताजी सफाई के बावजूद इसे लेकर राजनीति अभी खत्म नहीं हुई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सीबीआई और दिल्ली पुलिस से इस मामले पर एफआईआर दर्ज करने का आवेदन किया है। कांग्रेस लड़ाई आगे ले जाने के मूड में है। ममता बनर्जी ने भी इस डील पर शुक्रवार को सवाल उठाए।
वहीं, इस मामले पर शुक्रवार को एक आरटीआई के माध्यम से सामाजिक कार्यकर्ता विश्वनाथ चतुर्वेदी ने जानकारी मांगी कि राफेल डील वाले प्रधानमंत्री के पेरिस दौरे पर उनके साथ कौन-कौन लोग गए थे, वे किस होटल में रुके थे और उनके बिल का भुगतान किसने किया था। जाहिर है कि आम चुनाव की घोषणा से एक महीने से भी कम समय पहले विपक्ष इस मामले को जोरदार तरीके से उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे हमले करना चाहता है।
शुक्रवार को एक अंग्रेजी अखबार में रक्षा मंत्रालय के गोपनीय नोट के कुछ अंश प्रकाशित किए गए थे। राहुल गांधी ने पिछले महीने लोकसभा में राफेल मामले पर बोलते हुए सवाल उठाया था कि क्या रक्षा मंत्रालय ने इस सौदे पर आपत्ति जताई थी। यानी उन्हें इस दस्तावेज के बारे में पहले से जानकारी थी। अखबार में खबर छपने के चंद घंटों बाद राहुल ने मीडिया से बात करते हुए जो दस्तावेज़ दिखाया वह भी अधूरा था।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में इस नोट पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर की टिप्पणी का भी जिक्र किया। बाद में एक न्यूज एजेंसी के माध्यम से इस गोपनीय दस्तावेज को सार्वजनिक किया गया। लेकिन विपक्षी सांसदों का मानना है कि राफेल पर यह अंतिम दस्तावेज नहीं है।
रक्षा मंत्रालय के इस दस्तावेज में प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा समानांतर मोलभाव करने पर तत्कालीन रक्षा सचिव जी मोहन कुमार ने आपत्ति उठाई थी। इस पर परिक्कर ने उन्हें समझाने के अंदाज में लिखा कि यह आपका ओवर-रिएक्शन है। रक्षा सचिन प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव से बातकर मामले को सुलझा लें।