अल्बानिया की राजधानी तिराना में सुप्रीम कोर्ट को निशाना बनाकर शुरू हुआ हिंसक प्रदर्शन अब भारत में एक तीखे राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। जैसे-जैसे ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनसे पता चलता है कि यूरोप, दक्षिण अमेरिका और एशिया में एक सुनियोजित वैचारिक जाल फैला हुआ है, भारत के राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। इसमें विदेशी ताकतों के इशारे पर अराजकता फैलाने, सत्ता पलटने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
तिराना में सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन लगातार छठे दिन भी जारी रहे। प्रदर्शनकारियों ने अल्बानिया के सुप्रीम कोर्ट के दफ्तरों में आग लगा दी, साथ ही संसद, सरकारी मंत्रालयों की इमारतों और पुलिस बलों पर भी हमले किए। प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान हुई झड़पों में वाटर कैनन, आंसू गैस और रबर की गोलियों का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 270 से ज्यादा लोग घायल हो गए हैं।
संजय राउत ने क्या कहा?
अल्बानिया की इस घटना ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने एक्स (ट्विटर) पर इस हमले की खबर साझा करते हुए कहा कि भारत को इस अशांति से एक सबक लेना चाहिए। उन्होंने कहा, 'अल्बानिया की जनता ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है। जो भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था। प्रदर्शनकारी जनता ने संसद और सरकारी दफ्तरों पर भी हमले किए हैं। सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए।'
'देश में तिरंगा नहीं फहरा सकते, तो फिर हम क्या कर सकते हैं?'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर यह सरकार सत्ता में बनी रहती है, तो अराजकता फैलना तय है। मैं बस यही कह रहा हूं। सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए। हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, और केवल सुप्रीम कोर्ट ही देश को बचा सकता है। अगर हम अपने ही देश में तिरंगा नहीं फहरा सकते, तो फिर हम क्या कर सकते हैं?। इससे अराजकता फैलेगी। सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को देखना चाहिए।
राउत के बयानों की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ी निंदा की। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने पलटवार करते हुए विपक्षी गठबंधन पर आरोप लगाया कि वे खुले तौर पर राज्य-प्रायोजित हिंसा और संस्थागत पतन की इच्छा रखते हैं।
भाजपा ने क्या प्रतिक्रिया दी?
एक्स पर एक पोस्ट में भंडारी ने कहा,' कांग्रेस पार्टी और उसका गठबंधन अराजकता और सुप्रीम कोर्ट को धमकी दे रहे हैं। वे अराजकता की कल्पना कर रहे हैं। इससे साबित होता है कि वे अफरा-तफरी चाहते हैं। कांग्रेस पार्टी और उसका गठबंधन भारतीय लोकतंत्र के लिए खतरा हैं।'
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस हमले को और तेज करते हुए चेतावनी दी कि भारत के भीतर भी वैसी ही एक सोची-समझी और विदेशी ताकतों की ओर से समर्थित रणनीति अपनाई जा रही है, जैसी हाल ही में फ्रांस और बांग्लादेश में देखी गई थी। उन्होंने कहा कि भारत-विरोधी गिरोहों और कुछ राजनेताओं ने मिलकर युवाओं को भड़काने और हमारी सड़कों पर हिंसा फैलाने की साजिश रची है। भारत में सत्ता परिवर्तन बिल्कुल संभव है, लेकिन यह केवल चुनावों के जरिए हो सकता है, न कि सोरोस के जरिए।
फ्रांस प्रदर्शन में क्या पता चला?
सरकार की इस चेतावनी के मूल में ऐसे बढ़ते सबूत हैं जो बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रदर्शनों का इस्तेमाल व्यापक वैचारिक नेटवर्क द्वारा किया जा रहा है। फ्रांस में छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों पर 'फॉक्स न्यूज डिजिटल' की हालिया जांच में ऐसे 50 प्रमुख संगठनों की पहचान हुई है, जो इस आंदोलन को चला रहे थे। इनमें से केवल 15 ही वास्तविक युवा या छात्र समूह थे। बाकी 35 संगठनों में कम्युनिस्ट, समाजवादी, अति-वामपंथी राजनीतिक दल, मजदूर यूनियन और कट्टरपंथी विचारधारा वाले समूह शामिल थे।