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Politics: क्या 2022 में चैन से रह पाई मोदी सरकार, 2023 में चुनौतियां भी हैं बेशुमार?

सार

Politics: 2023 में राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। जम्मू-कश्मीर में भी संभावित माना जा रहा है। इनमें राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता हथियाई है...
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Politics: पीएम मोदी - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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2022 के जाने और 2023 के आने में महज चार दिन का समय बचा है। इस समय राहुल गांधी अपनी भारत जोड़ो यात्रा को 2 जनवरी तक के लिए विराम दे चुके हैं, लेकिन केंद्र के राजनीतिक सचिवालयों में हलचल काफी बढ़ी हुई है। भारत जोड़ो यात्रा की गरमाहट ने राहुल गांधी के भीतर वो ऊर्जा भर दी है, जिससे उन्हें महज एक टी-शर्ट में भी ठंड नहीं लगती। और इसी गरमाहट ने निराश हो चुके कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पार्टी मुख्यालय 24 अकबर रोड में बड़ी उम्मीदें भर दी हैं। लेकिन भारत जोड़ो यात्रा से लेकर बिहार, उत्तर प्रदेश, प. बंगाल, हिमाचल, पंजाब समेत तमाम राज्यों के हाल ने कड़ाके की सर्दी में भी दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय की कसरत बढ़ा दी है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह उत्तर प्रदेश को लेकर काफी गंभीर हैं। गृह मंत्री का प्रयास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौन स्वीकृति मानी जाती है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा उस पर बस मुहर भर लगा देते हैं। अमित शाह ने उत्तर प्रदेश में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य दोनों को आशीर्वाद दे रखा है। दोनों उपमुख्यमंत्री अपनी सक्रियता काफी बढ़ा रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम को लेकर कुछ सवाल हैं। इसके लिए मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा बढ़ा है। यह बात अलग है कि मुख्यमंत्री सुझावों का सम्मान करते हैं, लेकिन सवालों को खास तवज्जो नहीं देते। कुल मिलाकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की कोशिश उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2024 में 60 से अधिक सीटें पाने का माहौल तैयार करने की है। 2024 का लक्ष्य भी 300 से अधिक सीटों का रखा जाएगा।

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भारत जोड़ो यात्रा और भाजपा की चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वाराणसी में तमिल संगम हुआ। यह भाजपा की दक्षिण की तरफ मजबूती से बढ़ने की पहल थी। इसी दक्षिण में कन्याकुमारी से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 7 सिंतबर को भारत जोड़ो यात्रा शुरू की। भाजपा के गलियारे में कई नेता मान रहे हैं कि राहुल गांधी की इस भारत जोड़ो यात्रा से तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक समेत दक्षिण के राज्यों में कांग्रेस को दो बड़े लाभ मिले हैं। पहला यह कि कांग्रेस के सांसद ने इस दौरान नेताओं की आपसी गुटबाजी को बड़े पैमाने पर खत्म किया। कांग्रेस के संगठन को मजबूत बनाया। दूसरा बड़ा लाभ कांग्रेस के साथ यूपीए में शामिल सहयोगी दलों को मिलेगा। राहुल गांधी की इस यात्रा में महाराष्ट्र में भी काफी भीड़ उमड़ी थी। इस आधार पर कांग्रेस और भाजपा के कई नेता चर्चा में मानने लगे हैं कि यात्रा के बाद राहुल गांधी की जनसभाओं में भी बड़ी भीड़ उमड़ेगी। इससे जनता में सकारात्मक संदेश जा सकता है और भाजपा को इसका नुकसान हो सकता है। हालांकि ब्रिज शर्मा जैसे तमाम भाजपा के समर्थकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री शाह राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं। अभी लोकसभा चुनाव दूर है और वह 2023 में 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी द्वारा बनाई गई हवा को पंचर कर देंगे।

भाजपा तो शुरू से चिंतित थी

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी जयराम रमेश कहते हैं कि भाजपा शुरू से ही राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के खिलाफ दुष्प्रचार में जुटी है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा कहते हैं कि इसमें भला किसे संशय है। रोहन गुप्ता कहते हैं कि भाजपा के नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों ने तमाम कमियां खोजने और दुष्प्रचार की कोशिश की। अभी तक उन्हें इसमें जरा भी सफलता नहीं मिली है।   पार्टी के एक पुराने महासचिव ऑफ द रिकार्ड रहना पसंद करते हैं। वह कहते हैं कि राहुल गांधी ने जो मेहनत की है, वह अब आंखें बंद करने के बाद भी दिखाई देती है। प्रधानमंत्री मोदी की कैबिनेट के आधा दर्जन से अधिक मंत्रियों का बयान देख लीजिए, तो कुछ कहने की जरूरत भी नहीं है। राहुल गांधी के सचिवालय के एक सदस्य का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया का जब राहुल को लिखा पत्र उन्होंने देखा, तभी समझ गए थे कि न केवल भाजपा, अब तो केंद्र सरकार भी घबराने लगी है। वह मंत्री स्मृति ईरानी की भी चुटकी लेते हैं। कहते हैं कि उन्हें अमेठी संसदीय सीट पर अभी से हार के सपने आने लगे हैं। हालांकि सूत्र का कहना है कि कांग्रेस हमेशा अति आत्मविश्वास में पिछड़ती है। इसलिए सावधान रहने की जरूरत है।

2023 ही दिखाएगा 2024 का रास्ता

2023 में राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं। जम्मू-कश्मीर में भी संभावित माना जा रहा है। इनमें राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार है। मध्यप्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस से सत्ता हथियाई है। मध्यप्रदेश से पहले इसकी पुनरावृत्ति कर्नाटक में हुई। दोनों ही राज्यों में भाजपा के सामने सरकार बचाने की चुनौती है। जबकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता पाने की उम्मीद। तेलंगाना में भी विधानसभा चुनाव होना है और वहां के मुख्यमंत्री और सत्ताधारी दल बीआरएस के नेता के. चंद्रशेखर राव भाजपा से बड़ा खतरा महसूस कर रहे हैं। इसे भांपकर ही उन्होंने जद(यू), राजद, कांग्रेस, सपा, वाम दल समेत तमाम विपक्षी दलों से संपर्क तेज कर दिया है। इसके अलावा त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम अपेक्षाकृत छोटे राज्य हैं, लेकिन देश में राजनीतिक वातावरण को बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं को लग रहा है कि भारत जोड़ो यात्रा ने इन नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ी ताकत दी है। रोहन गुप्ता भी कहते हैं कि 2023 के नतीजे से 2024 का माहौल बनने लगता है।

सत्ताधारी दल की असली चिंता क्या है?

देश में मंहगाई और बेरोजगारी उच्चतम स्तर पर है। कांग्रेस के नेता इसे खूब प्रचारित भी कर रहे हैं। पिछले साल किसान भी दिल्ली में बड़ा आंदोलन कर चुके हैं। बड़े आश्वासन के साथ लौट गए थे, लेकिन उनके हितों का टकराव अभी बना हुआ है। भाजपा के अंदरखाने में जो बड़ी चिंता दिखाई दे रही है, वह 2023 में किसान आंदोलन जैसे किसी बड़े सामाजिक आंदोलन की संभावना को लेकर ही है। संघ के नेता ज्ञानेश्वर शुक्ला कहते हैं कि ऐसा कुछ हुआ तो मुश्किल बढ़ जाएगी। समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की टीम के सदस्य संजय लाठर कहते हैं कि आपने उपचुनाव के नतीजे देख लिए। लाठर के मुताबिक रामपुर की सीट पर भाजपा की जीत को लेकर कुछ कहने से कोई फायदा नहीं है। लेकिन शेष नतीजे काफी कुछ कह रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण भाजपा के कोरे वादे हैं। अब जनता धीरे धीरे जवाब देने के मूड में आ रही है। संघ के भी कुछ नेताओं को लग रहा है कि 2024 का चुनाव 2019 से बहुत अलग होगा। वह कहते हैं कि चुनौतियां बढ़ रही हैं, लेकिन इसके साथ आत्मविश्वास भी जताते हैं। संघ के एक बड़े नेता का कहना है कि देश की सबसे निचली ईकाई गांव तक हमारा संगठन है। इसलिए तमाम चुनौतियों के बाद भी हम नाउम्मीद नहीं होते। तरुण शुक्ला जैसे भाजपा के नेता का कहना है कि यह मत भूलिए कि भाजपा के पास प्रधानमंत्री मोदी जैसा नेता है।

हर चाल बड़ी सावधानी से चल रहे हैं प्रधानमंत्री मोदी

जनवरी 2023 में केंद्रीय मंत्रिमंडल का फेरबदल और विस्तार हो सकता है। यह आखिरी होगा और 2024 को ध्यान में रखकर ऐसा होने की पूरी उम्मीद है। इससे पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी में तमिल संगम का उद्घाटन किया था। गृह मंत्री अमित शाह हर राज्य में पार्टी की तैयारी पर लगातार बैठक और समीक्षा कर रहे हैं। पिछले दो साल से भाजपा 2019 के चुनाव में हारी हुई सीटों को 2024 में जीत में बदलने के लिए लगातार प्रयत्नशील है। इसके लिए लगातार संगठन को मजबूती देने की पहल हो रही है। केंद्रीय कैबिनेट ने 81.35 करोड़ लोगों को एक साल के लिए और मुफ्त अनाज देने की योजना को मंजूरी दे दी है। 2023 में 20 जनवरी को भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल पूरा होगा और पार्टी को इस बारे में भी फैसला लेना है। इसके अलावा भाजपा और केंद्र सरकार नए सहयोगियों और राजनीति के दांव पेंच पर काफी काम कर रही है। मसलन, तृणमूल कांग्रेस की नेता और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से रिश्ते बदलने के प्रयास हो रहे हैं। कुछ उम्मीद शिवसेना के साथ भी संभव है। लोक जनशक्ति पार्टी के दोनों धड़ों में तालमेल बिठाने पर जोर है और उपेंद्र कुशवाहा, मुकेश साहनी जैसे सहयोगियों के साथ प्रयास जारी है। उत्तर प्रदेश में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओम प्रकाश राजभर के सुर में लगातार बदलाव आ रहा है। कुल मिलाकर यह कसरत 2024 की सोशल इंजीनियरिंग के लिए ही हो रही है।

जम्मू-कश्मीर से भी है बड़ी उम्मीद

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा राज्य में कम हो रहे आतंकवाद को बड़ा बदलाव मानते हैं। वह कहते हैं अब पूरे कश्मीर में तिरंगा लहराता है, राष्ट्रगान गाए जाते हैं। वह इस शांति और अमन की बहाली को राष्ट्र के लिए बड़ा तोहफा बताते हैं। साथ में संभावना जताते हैं कि जल्द चुनाव होंगे। केंद्रीय सचिवालय के कुछ बड़े अफसर कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए और इसके नतीजे आने के बाद जो सरकार बनेगी, वह पूरे देश के राजनीतिक वातावरण को प्रभावित करेगी। आप कह सकते हैं कि आखिरी समय में भी पासा पलटने में भरोसा रखने वाले प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के लिए यह तुरुप का इक्का हो सकता है। क्योंकि 2024 तक अयोध्या में राम मंदिर बन जाएगा। नया संसद भवन तैयार होगा और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के सहारे भाजपा हिंदुत्व की राजनीति को आगे बढ़ाने में सफल रहेगी। ऐसा ज्यादातर भाजपाई मानते हैं।

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