सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडु ने कहा है कि जो लोग पठानकोट हमले के प्रसारण को लेकर एनडीटीवी पर 24 घंटे के प्रतिबंध की आलोचना कर रहे हैं, उन्हें तथ्यों की जानकारी नहीं है, वे राजनीति से प्रेरित हैं और विवाद पैदा करना चाह रहे हैं।
शनिवार को चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा है कि प्रेस की आजादी महत्वपूर्ण है, लेकिन राष्ट्र की सुरक्षा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस मामले में एनडीटीवी इंडिया ने अपने अधिकार का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं किया। लोगों को पता होना चाहिए है कि कांग्रेस की यूपीए सरकार के दस साल के कार्यकाल में 21 ऐसे मामले हैं, जब टीवी चैनल के प्रसारणों को रोका गया। अश्लील दृश्य और व्यस्क श्रेणी की फिल्मों को दिखाने के लिए एक दिन से दो महीने तक के लिए टीवी चैनलों पर रोक लगाई गई।
एक चैनल पर स्टिंग ऑपरेशन दिखाने के लिए 30 दिन के लिए बैन कर दिया गया था। लोग इस बात को समझते है कि आधाी रात को अश्लील दृश्य दिखाना या फिर दिन के उजाले में सेना के आतंकवादी रोधी ऑपरेशन का सीधा प्रसारण दिखाने के दोनों मामलों में कौन सा उल्लंघन ज्यादा बड़ा है।
नायडु ने कहा कि एनडीटीवी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किसी नये नियम या सिद्धांत के आधार पर नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि 2008 में 26/11 के मुम्बई आतंकी हमले के बाद यूपीए सरकार द्वारा जारी किये गये परामर्शों के आधार पर ही एनडीटीवी पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वर्ष मार्च में एक गजट अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार व्यापक सुरक्षा हितों के मद्देनजर टीवी चैनल, आतंक रोधी अभियान का सीधा प्रसारण न करें और केवल अधिकृत अधिकारियों द्वारा अभियान के संबंध में दी गई जानकारी ही प्रसारित करें।