महाराष्ट्र में जारी सियासी घमासान के बीच एक बड़े राजनीतिक बदलाव की संभावनाएं तेज हो गई है। जहां एक बार फिर चर्चा है कि ठाकरे परिवार के दो प्रमुख चेहरे राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे फिर से साथ आ सकते हैं। बता दें कि साल 2005 में शिवसेना से अलग होकर अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) बनाने वाले राज ठाकरे और शिवसेना (यूबूटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल ही में मराठी संस्कृति और पहचान की रक्षा के नाम पर फिर से साथ आने का संकेत दिया है, जिसके बाद से राजनीतिक गलियारे में चर्चा तेज है कि आगामी मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव में ठाकरे बंधु का साथ आना क्या भाजपा को कड़ी चुनौती देने की रणनीति हो सकती है।
भाजपा ने साफ किया रुख
हालांकि इस बात पर भाजपा ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। बीएमसी चुनाव से पहले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने के अटकलों पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर वे साथ आते हैं तो भाजपा को खुशी होगी, लेकिन यह गठबंधन भाजपा को हरा नहीं पाएगा। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि यह राज ठाकरे का फैसला है और भाजपा को कोई आपत्ति नहीं है।
इसके साथ ही कांग्रेस ने भी इन संभावनाओं के पूरी तरह से हवा दी। पार्टी ने संकेत दिया है कि उन्हें इस पर कोई ऐतराज नहीं है, और उनका मानना है कि राज ठाकरे भी भाजपा की मराठी विरोधी नीतियों के खिलाफ हैं। इसके अलावा एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले ने इसे खुशखबरी बताया। साथ ही कहा कि अगर बाल ठाकरे ज़िंदा होते, तो वे जरूर खुश होते।
राजनीतिक विरोध और आलोचना भी