आम बजट में वित्त मंत्री के राजनैतिक दल की 2000 रुपए नकदी चंदे की सीमा तय करने के फैसले को ऐतिहासिक माना जा रहा है। लेकिन इस पहल से फिर भी पता नहीं चल पाएगा कि किसी दानदाना ने चेक या ऑनलाइन माध्यम से कितना पैसा राजनैतिक पार्टियों को दिया। क्योंकि पार्टियां उस दानदाता का चंदा बताने के लिए बाध्य नहीं हैं जो उन्हें 20 हजार रुपए से कम चंदा देता है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट में ऐलान किया है कि कोई भी राजनैतिक दल किसी दानदाता से दो हजार से ज्यादा का नकद नहीं ले सकता है। ये माना जा रहा है कि इससे राजनैतिक दलों में पारदर्शिता आएगी।
एडीआर के संस्थापक सदस्य जगदीप छोकर कहना है कि इससे फिर भी यह पता नहीं लग पाएगा कि किस राजनैतिक पार्टी को किसने कितने चंदा दिया है अगर दानदाता 20 हजार रुपए से कम चंदा देता है तो। क्योंकि चुनाव आयोग से राजनैतिक पार्टियों को छूट मिली हुई है कि वह दानदाता के 20 हजार रुपए से कम चंदा देने वाले का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं है। यह नियम अब भी लागू होगा।