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कानों देखी : सियासत में किसी के पास मां है तो किसी के पास बाप

Sun, 26 Apr 2020 04:01 PM IST
अमित कुमार शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पीएम मोदी और सोनिया गांधी (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया
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सत्तर के दशक की मशहूर फिल्म 'दीवार' का एक बेहद लोकप्रिय संवाद है, जिसमें विजय (अमिताभ बच्चन) अपने भाई पुलिस इंस्पेक्टर (शशि कपूर) से पूछता है, 'मेरे पास गाड़ी है, बंगला है, बैंक बैलेंस है तुम्हारे पास क्या है?' तो जवाब में पुलिस इस्पेक्टर कहता है, 'मेरे पास मां है।' 

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इन दिनों राजनीति में भी सिर्फ मां ही नहीं बल्कि बाप को लेकर भी खासी होड़ है। ताजा मामला पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद का है। सलमान खुर्शीद ने एक बयान में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को देश की मां बता दिया। जब इसकी प्रतिक्रिया लेने के लिए कांग्रेस के एक बड़े नेता से बात की गई तो पहले वह मुस्कराए। फिर थोड़ा रुके। इसके बाद उन्होंने कहा कि यह सलमान खुर्शीद की टीआरपी है। कुरेदकर पूछने पर नेता जी ने कहा कि इस समय देश में दो तरह के नेता हैं। कुछ जिनके पास मां है तो कुछ जिनके पास बाप है। बाकी सब सियासत में बिना मां बाप वाले हैं। 

इसकी व्याख्या करने के आग्रह पर उन्होंने कहा कि सलमान खुर्शीद जैसों के लिए सोनिया जी मां हैं। सांबित पात्रा जैसों के लिए प्रधानमंत्री मोदी देश के बाप हैं। शेष जितने नेता सियासत में बिन मां बाप वाले यानी अनाथ हैं।
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सिंधिया पर नजरें गड़ाए हैं कांग्रेसी

कांग्रेस के नेता ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने और मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरवाने को अभी तक हजम नहीं कर पाए हैं। उनकी नजरें इस पर लगी हैं कि वनवास भोग रही कांग्रेस को छोड़कर राजपाट वाली भाजपा में गए ग्वालियर महाराज को भाजपा किस हद तक अपनाती है और क्या उन्हें वही मान सम्मान मिलेगा जो कांग्रेस में था। 

हाल ही में हुए मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह सरकार के पांच सदस्यीय मंत्रिमंडल के गठन और विभागों के बंटवारे के अलग अलग मायने कांग्रेसी निकाल रहे हैं। जहां पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पांच मंत्रियों के विभागों का बंटवारे को लेकर पूछने पर मुस्कराने लगते हैं, वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता ट्वीट करके अपनी राय दे रहे हैं। 

एक कांग्रेसी नेता ने ट्वीट में तंज कसा कि कहां कमलनाथ सरकार में उप मुख्यमंत्री का पद मिल रहा था और सिंधिया के खास तुलसी सिलावट और गोविंद राजपूत के विभाग भी मलाईदार थे। मगर श्रीमंत महाराज को रास नहीं आया और कांग्रेसी तिरंगा छोड़कर भाजपा का भगवा झंडा थाम लिया। कांग्रेसी कहते हैं कि कांग्रेस में महाराज सीधे राहुल, प्रियंका और सोनिया को फोन खड़काते थे। मध्य प्रदेश ही नहीं देश में कांग्रेस के बड़े नेता भी उनके खिलाफ बोलने से डरते थे। कहां अब श्रीमंत को अपने साथियों को मंत्रिपरिषद में जगह और विभाग दिलाने के लिए अमित शाह, नड्डा, शिवराज आदि नेताओं के चक्कर काटने पड़े। 

इसके बावजूद गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे विभाग नरोत्तम मिश्रा ले उड़े। पुराने कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री और ग्वालियर चंबल क्षेत्र के ही दिग्गज विधायक गोविंद सिंह का कहना है कि कांग्रेस में उन्होंने कभी नेताओं के साथ जमीन पर बैठकर समोसे नहीं खाए। भाजपा में यह नौबत भी आ गई। कोरोना की वजह से फिलहाल राज्यसभा भी अटकी है, शिवराज का कैबिनेट जब पूरा सजेगा तो देखा जाएगा कि भाजपा राज में महाराज की हिस्सेदारी क्या होगी।

कांग्रेस ने मुसलमानों को चौंकाया....कहा मस्जिद में जाने से बचे

वक्त और सियासी बदहाली ने कांग्रेस को भी सिखा दिया है कि उसे खुद पर लगे मुस्लिम परस्ती के दाग को कैसे धोना है। दरअसल दिल्ली में रमजान के महीने में जुमा की नमाज अदा करने के लिए मस्जिद में मुस्लिम इकट्ठा होना चाहते थे लेकिन राजधानी में कोरोना संक्रमण के फैलाव को देखते हुए पुलिस ने अनुमति नहीं दी। 

एक पत्रकार ने मौका देखकर पार्टी के मीडिया विभाग के प्रभारी रणदीप सुरजेवाला से इस पर सवाल पूछ लिया। सुरजेवाला के बारे में एक बात अच्छी है कि वह हालात को भांप लेते हैं। सवाल आते ही उन्होंने जवाब दाग दिया। सुरजेवाला ने कहा कि कोविड-19 का संक्रमण जाति, धर्म, संप्रदाय, क्षेत्र कुछ नहीं देखता। भारत के संविधान में सभी धर्मों का आदर है। कांग्रेस भी इसका आदर करती है। सभी धर्मों मे पूजा पद्धतियां हैं। इसलिए उन्होंने सलाह दे डाली कि मुसलमान भाइयों को चाहिए संक्रमण के खतरे को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। घर में ही नमाज अदा करें। सुरजेवाला के इस जवाब से जाहिर है कि कांग्रेस अब ज्यादा दिनों तक मुस्लिम परस्ती का आरोप ढोने के लिए तैयार नहीं है। इसे कहते हैं देर आयद दुरुस्त आयद।

 
 
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विदेश मंत्री की लॉकडाउन कूटनीति  

लॉकडाउन के दौरान किसी भी मंत्री का विदेश दौरे का सवाल ही नहीं उठता, चाहे विदेश मंत्री ही क्यों न हों। लेकिन विदेश मंत्री एस जयशंकर न सिर्फ लॉकडाउन का फायदा किताबें पढ़कर उठा रहे हैं बल्कि उनकी लॉकडाउन कूटनीति भी जारी है। वह विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों से भी लगातार संपर्क में हैं। 

साथ ही दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों और कूटनीतिज्ञों से अपने निजी रिश्तों का फायदा उठाते हुए न सिर्फ उन देशों में कोरोना के खिलाफ कैसे लड़ाई लडी जा रही है, इसकी जानकारी ले रहे हैं बल्कि भारत किस तरह से कोरोनो के खिलाफ कामयाब जंग लड़ रहा है। इसे लेकर भारत की वैश्विक छवि बनाने में अपने संपर्कों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जाहिर है विदेश सेवा के अधिकारी रहे एस जयशंकर के पास लॉकडाउन में कोई दूसरी व्यस्तता नहीं है। वह पारंपरिक नेता भी नहीं हैं कि स्थानीय लोगों का फोन सताए। खाड़ी देशों में भारत में मुसलमानों की स्थिति को लेकर फैली गलतफहमी दूर करने में भी जयशंकर ने खासी मेहनत घर में बैठे बैठे ही की है। विदेश मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि ऐस में वह लॉकडाउन के समय का काफी बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं।
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