आम आदमी पार्टी और उसके नेता अरविंद केजरीवाल फाऊल गेम खेल रहे हैं। दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर भाजपा मुख्यालय में बैठकर सोशल मीडिया पर गहरी नजर रखने वाले सूत्र का कहना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों पर अरविंद केजरीवाल की स्टाइल इस बार भारी पड़ने वाली है। सूत्र का कहना है कि उनके डिप्टी सीएम पर आरोप है और वह खुद को बचाने के लिए तमाम पैंतरे बदल रहे हैं। चुनावी रणनीति में खासा प्रभाव रखने वाले भाजपा नेता कहना है कि देश की जनता घोटालेबाज को माफ नहीं करती। यूपीए की सरकार इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। वह आगे गिनाते हुए कहते हैं कि बिहार में 2005 से नीतीश कुमार हैं। उत्तर प्रदेश में न अखिलेश चल रहे हैं, न मायावती। गुजरात में भाजपा का तोड़ नहीं है। उत्तराखंड, त्रिपुरा में हमारी सरकार आई है। 2014 और 2019 का आम चुनाव का जनाधार देख लीजिए। यह कुछ और नहीं जनता का मूड बता रहा है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ी भूमिका निभाने वाले सूत्र का कहना है कि बैटिंग 2024 की ही चल रही है। जबकि विपक्ष के नेताओं की कोशिश अपनी राजनीति को बचाने की है।
कवन सो काज कठिन जग माहीं....
4 मार्च को सालासर में बालाजी के दरबार में जन्मदिन मनाने के बाद से ही राजघराने से ताल्लुक रखने वाली महारानी मुस्करा रही हैं। उनके एक करीबी कहते हैं कि वसुंधरा को समझ पाना आसान नहीं है। उन्होंने तो बाला जी के दरबार में खुद को चरणों में रख दिया था। एक पूर्व मंत्री ने कहा था कि कहां जयपुर से लेकर दिल्ली के कुछ नेता चाहते थे कि सालासर का शो फ्लाप हो जाए। लेकिन इन्हें हनुमान जी की महिमा का अंदाजा नहीं था। दर्जनों विधायक, सांसदों की मौजूदगी देखकर अब सबको हनुमान जी याद आ रहे हैं। टीम वसुंधरा जैसी ही खबर अब भोपाल से टीम शिवराज भी दे रही है। खंडवा के एक नेता जी कहते हैं कि सामने अब 2023, फिर 2024 है। आखिर कब तक अदला, बदली करवाइएगा। यह कोई उत्तराखंड, त्रिपुरा तो है नहीं।
कर्नाटक में क्या होगा?
ऐसे ही हर सवाल के जवाब में भाजपा के दिल्ली के एक नेता का कहना है कि "होइहि सोई जो राम रचि राखा"। बताते हैं कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लगातार बेंगलुरु के दौरे पर रहते हैं। पूर्व प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर वाली रणनीति भी अपनाई जा रही है। बाकी का भरोसा पार्टी को अपने राजनीति के मास्टर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर है। वहीं खबर है कि संगठन मंत्री बीएल संतोष से भी आग्रह किया गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री येदियुरप्पा, मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई के बीच समीकरण को समझें। जर्नादन रेड्डी ब्रदर्स भी नाक से चने चबवा रहे हैं।
भाजपा जैसी ही कहानी कांग्रेस की भी है। हालांकि राहुल गांधी विदेश दौरे से लौटने के बाद 20 मार्च को कर्नाटक में रहेंगे। कांग्रेस के डीके शिवकुमार की कहानी भी गजब है। डीके के आगे कर्नाटक कांग्रेस के महत्वाकांक्षी तमाम कांग्रेसी फीके हैं। डीके की तकलीफ राहुल गांधी के दफ्तर से भी जुड़ी है। कभी डीके आंखों के तारे थे। आजकल उनके सिर के ऊपर तारे हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष भी कुछ करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। कांग्रेस के नेता और पूर्व मंत्री सिद्धारमैया अभी भी हैंगओवर से बाहर नहीं आ पाए। जी परमेश्वरन जैसे नेता कहते हैं कि उनके जैसे पार्टी में 10 नेता मुख्यमंत्री बनना चाहते हैं। ऐसे में क्या बताएं कि कांग्रेस में क्या होगा?
बस बाबा के बुलडोजर बा
उत्तर प्रदेश में का बा। बाबा के बुलडोजर बा। रौंद देला। यह हम नहीं उत्तर प्रदेश विधान सभा के एक पॉवरफुल दफ्तर के भीतर की चर्चा है। ऐसी चर्चा की शुरुआत प्रयागराज के धूमनगंज में बाहुबली अतीक अहमद के करीबियों के कारनामे से शुरू हुई। मध्यांतर आते-आते इसमें तमाम भाजपा के नेताओं के नाम आने लगे हैं। ताजा खबरें हैं कि एक मंत्री का नाम आने पर खुद मुख्यमंत्री ने भी बड़े अजीब भाव में प्रतिक्रिया दे दी थी। बताते हैं जिस दिन विधानसभा में अखिलेश यादव ने 'मिर्ची लगवाई' थी, उस दिन मुख्यमंत्री का मिजाज देखने के काबिल था। इसी बीच में न्याय विभाग में तैनात एक अफसर की एंट्री हुई। एक बड़े साहब ने कहा कि जब इनका (न्याय) विभाग ही ऐसा है तो हम क्या कर सकते हैं? इतना सुनते ही साहब तैश में आ गए। बोल पड़े। जब सब काम आपका बुल्डोजर कर देगा तो हम क्या कर सकते हैं? साहब ने तंज मारा। सबको पता था जेल में क्या हो रहा है? कौन नहीं जानता कि पुलिस रेल बना रही है? किसे नहीं पता कि एसटीएफ चीफ और एडीजी आन डिमांड काम कर रहे हैं, तो इसमें किसी और को दोष देने से क्या फायदा? बस 1090 रुपये में रसोई गैस सिलेंडर भरवाइए और मजे लीजिए।
खरगे जी टीम तो बना दीजिए
कांग्रेस पार्टी के निर्वाचित अध्यक्ष खरगे जी की तरफ कांग्रेस शासित राज्य और बड़े नेता देख रहे हैं। हालांकि इनमें अधिकांश सांसद राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा से जुड़ने में भरोसा रख रहे हैं। महाराष्ट्र के एक नेता जी इन दिनों दिल्ली में हैं। उन्हें भी एक-दो सप्ताह में कांग्रेस की टीम घोषित होने का भरोसा है। बताते हैं टीम छोटी हो सकती है। नेता कम काम ज्यादा के फॉर्मूले को अपनाया जा सकता है। नेता जी को भी लग रहा है कि खरगे अपने और कांग्रेस पार्टी उम्र की चाल से चल रहे हैं। जबकि मुकाबले में 43 साल की अधेड़ पार्टी है।
मंत्री जी गाय को भूख से बचाने के लिए आपके विचार बड़े नेक हैं
नाम लेना ठीक नहीं है, लेकिन यह उत्कृष्ट विचार योगी सरकार की कैबिनेट के एक मंत्री के हैं। मंत्री जी की गिनती प्रधानमंत्री के प्रिय चेहरे में होती है। उन्होंने गाय, सांड़ और छुट्टा गौवंश को भूख से तथा किसानों को फसलों के नुकसान से बचाने के लिए यह विचार दिया। बताया कि गांवों में तमाम खाली जमीने हैं। सरकार इस पर घास उगाने की योजना पर विचार कर रही है। ऐसा हो जाने पर इस समस्या से बड़े पैमाने पर राहत मिल जाएगी। गौवंश का जब पेट भरा रहेगा, तो वह किसानों की फसल बर्बाद नहीं करेगा। इतना ही नहीं भूख से गायों की मौत भी नहीं होगी। साहब ने आगे भी बताया कि देखिए गौशाला या अस्थायी गौवंश प्रबंधन वाला प्रयोग फेल हो चुका है। यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता जा रहा है। ऐसे में इस स्थायी समस्या का कुछ स्थायी और ठोस उपाय ढूंढना ही होगा।