एनसीपी नेता शरद पवार के आवास पर जिस तरह के राजनीतिक जमावड़े के कयास दो सप्ताह से लगाए जा रहे थे सब खोखले निकले। मंगलवार को बैठक में पंहुचे कुछ शायर, पूर्व न्यायाधीश, सामाजिक कार्यकर्ता और कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं ने साफ कर दिया कि कोई राजनीतिक चर्चा ही नहीं हुई।
बैठक न तो भाजपा के खिलाफ कोई मोर्चा बनाने के लिए बुलाई गई न ही कांग्रेस को अलग-थलग करने के लिए थी। बैठक के बाद एनसीपी नेता माजिद मेनन कहा कि बैठक शरद पवार ने नहीं, टीएमसी नेता यशवंत सिन्हा ने राष्ट्र मंच के बैनर तले बुलाई थी।
पवार के आवास 6 जनपथ हुई बैठक को लेकर लगातार खबरें आ रही थीं कि केंद्र में भाजपा और नरेंद्र मोदी के खिलाफ गैरकांग्रेसी तीसरे मोर्चे का गठन किया जाना है और 2024 के लिए संयुक्त उम्मीदवार का चेहरा भी तय होना है। एनसीपी और बैठक बुलाने वाले राष्ट्र मंच के यशवंत सिन्हा की ओर से ऐसी खबरों का खंडन हुआ।
मंगलवार को बैठक करीब ढाई घंटे चली। जिसमें शरद पवार को छोड़ कोई कद्दावर नेता नहीं पंहुचा। सीपीएम नेता नीलोत्पल बासु थे जिन्होंने बताया कि बैठक में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई, सिर्फ बेरोजगारी और महंगाई को लेकर चर्चा हुई। साहित्यिक क्षेत्र से लेखक जावेद अख्तर थे। पूर्व न्यायाधीश एपी शाह भी बैठक में मौजूद थे। पूर्व राजदूत केसी सिंह, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी पहुंचे थे, लेकिन थोड़ी ही देर में वहां से निकल भी गए।
सीपीआई से बिनय विश्वम, समाजवादी पार्टी से घनश्याम तिवारी, पूर्व सांसद जयंत चौधरी, आप से सांसद सुशील गुप्ता और कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता संजय झा भी मौजूद थे। शरद पवार के अलावा उनके दल का प्रतिनिधित्व अधिक था। सांसद बेटी सुप्रिया सुले, राज्यसभा सांसद माजिद मेनन, सांसद वंदना चव्हाण भी थीं। माजिद मेनन ने बैठक के बाद मीडिया से कहा कि ऐसा कुछ नहीं है कि यहां एंटी भाजपा के लोगों या कांग्रेस को किनारे करने लिए लोग आए थे। हमने तो भाजपा सांसद मनोज तिवारी, कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी, शत्रुघ्न सिन्हा, विवेक तन्खा को भी न्यौता दिया था बहुत से लोग दिल्ली में नहीं होने के कारण नहीं पंहुचे।