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Shahjahan Sheikh: शाहजहां शेख से बदले बंगाल के राजनीतिक समीकरण, दीदी को मुश्किल, तो भाजपा को होगा फायदा

सार

पश्चिम बंगाल के पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा ने प्रदेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचार किए जाने का मामला पूरे जोर शोर से उठाया था। भाजपा नेताओं ने यह बताने की कोशिश की थी कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू समुदाय के लोगों को विस्थापन, हिंसा और भेदभाव का शिकार होना पड़ रहा है...
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Shahjahan Sheikh, Mamata Banerjee - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
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विस्तार
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शाहजहां शेख का मुद्दा आने वाले लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनेगा। भाजपा नेता इसे पूरी तरह लोगों के बीच ले जाएंगे और ममता बनर्जी सरकार को मुस्लिम तुष्टीकरण के आधार पर घेरने की कोशिश करेंगे। विशेषकर मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू मतदाताओं के बीच यह संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, जिसका ममता बनर्जी को नुकसान तो भाजपा को लाभ हो सकता है। यदि पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक आधार पर मतदाताओं का विभाजन होता है, तो इससे स्थापित राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

दरअसल, पश्चिम बंगाल के पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी भाजपा ने प्रदेश में हिंदू समुदाय पर अत्याचार किए जाने का मामला पूरे जोर शोर से उठाया था। भाजपा नेताओं ने यह बताने की कोशिश की थी कि पश्चिम बंगाल में मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदू समुदाय के लोगों को विस्थापन, हिंसा और भेदभाव का शिकार होना पड़ रहा है।

विधानसभा में नहीं हुआ था लाभ

लेकिन भाजपा के जोरदार अभियान के बाद भी पश्चिम बंगाल में हिंदू-मुस्लिम समुदाय में बड़ा विभाजन नहीं हो पाया था। कहा जाता है कि इसके पीछे पश्चिम बंगाल की संस्कृति बहुत हद तक जिम्मेदार है, जहां हिंदू-मुस्लिम में बहुत ज्यादा भेद नहीं है। वहां का मुसलमान भी दुर्गा पूजा में शामिल होता है, तो हिंदू समुदाय को भी मस्जिदों से उठने वाली अजान से कोई परेशानी नहीं है।

इसी का परिणाम हुआ था कि भाजपा पश्चिम बंगाल में एक सीमा से आगे नहीं बढ़ पाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी के हाई प्रोफाइल प्रचार अभियान के बाद भी भाजपा केवल 77 सीटों पर सिमट कर रह गई। जबकि इसी चुनाव में उसके मत प्रतिशत में 28 फीसदी और 74 सीटों की शानदार बढ़ोतरी हुई थी।    

नई चुनौती

दरअसल, पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 18 सीटें हासिल की थीं। बदले राजनीतिक समीकरणों में अनुमान लगाया जा रहा था कि भाजपा इस बार अपनी पिछली बढ़त को यहां बरकरार रखने में कामयाब नहीं होगी। लेकिन जिस तरह संदेशखाली की घटना घटी है, और जिस तरह हिंदू समुदाय में शाहजहां शेख पर कार्रवाई न करने के कारण ममता सरकार के खिलाफ नाराजगी बढ़ी है, उसका बड़ा असर हो सकता है। अनुमान है कि इस माहौल में भाजपा न केवल अपनी पिछली सीटों की संख्या को बरकरार ऱख सकती है, बल्कि वह और ज्यादा सीटें भी जीत सकती है।

भाजपा के आरोप

भाजपा ने आरोप लगाना शुरू कर दिया है कि ममता बनर्जी सरकार ने शाहजहां शेख को 55 दिनों तक बचाए रखा। अब वह इस मामले को केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने की मांग को लेकर बड़ा जन आंदोलन करने की तैयारी कर रही है। यदि यह मामला सीधे अदालत की देखरेख में नहीं जाता है, तो भाजपा इस पर बड़ा आंदोलन भी कर सकती है।   

पश्चिम बंगाल भाजपा नेता दिलीप घोष ने अमर उजाला से कहा कि पूरा बंगाल यह देख रहा है कि सरकार ने एक अपराधी को 55 दिन तक छुपाए रखा। उसने तब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया, जब तक कि अदालत ने इस मामले में दखल नहीं दिया। ऐसे में पश्चिम बंगाल की पुलिस से उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नहीं है। वह जांच को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे में इस मामले की पूरी सच्चाई सामने आने के लिए इस मामले को केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंप दिया जाना चाहिए।

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