Climate Change: कॉप-29 के मनोनीत अध्यक्ष मुख्तार बाबायेव ने कहा कि जलवायु वित्त के मुद्दे पर असहमति है, जिसके लिए राजनीतिक दिशा की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, हमें इस पर उच्च स्तरीय चर्चा की जरूरत है।
साल 2025 के बाद विकासशील देशों के जलवायु कार्यों का समर्थन करने के लिए एक नए वित्तीय लक्ष्य पर असहमति हल करने के लिए सही राजनीतिक दिशा की जरूरत है। संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन के प्रमुख मुख्तार बाबायेव ने बुधवार को यह बात कही।
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अजरबैजान के बाकू में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन के केंद्र में जलवायु वित्त होगा। जहां दुनिया नए सामूहिक मात्रात्मक लक्ष्य (एनसीक्यू) पर सहमत होने की समय सीमा तक पहुंच जाएगी। विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई का समर्थन करने के लिए विकसित देशों को 2025 से हर साल नई राशि जुटानी होगी। लेकिन जर्मनी के बॉन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु वार्ता को देखते हुए इस पर आम सहमति हासिल करना आसान नहीं होगा।
कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP29) के मनोनीत अध्यक्ष बाबायेव ने जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र रूपरेखा सम्मेलन (यूएनएफसीसीसी) पर हस्ताक्षर करने वाले करीब 200 देशों को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख मुद्दों पर असहमति है, जिसके लिए राजनीतिक दिशा की जरूरत होगी और हमें इन बिंदुओं पर उच्च स्तरीय चर्चा पर फोकस करना चाहिए।
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बाबायेव ने कहा कि जलवायु वित्त, वार्ता और जलवायु कूटनीति में सबसे चुनौतीपूर्ण विषयों में से एक रहा है और राजनीतिक रूप से जटिल मुद्दों को अकेले वार्ताकार हल नहीं कर सकते हैं। साल 2009 में कोपेनहेगन में संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में अमीर देशों ने साल 2020 से विकासशील देशों को सालाना 100 अरब डॉलर की मदद देने का वादा किया था, ताकि जलवायु प्रभावों को कम किया जा सके। लेकिन, इस लक्ष्य को हासिल करने में देरी ने विकसित और विकासशील देशों के बीच भरोसे को खत्म कर दिया है। यह वार्षिक जलवायु वार्ता के दौरान विवाद की एक वजह रही है।