एसआईआर और परिसीमन के मुद्दे पर सियासी तकरार जारी है। कांग्रेस परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग कर रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वे 21 अक्तूबर को पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने मंगलवार को कहा कि वह मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण, परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर अपनी चिंताओं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि वह इन मुद्दों पर मंगलवार को नहीं, बल्कि 21 अक्तूबर को अपनी बात रखेंगे।
खरगे ने पत्रकारों से कहा, 'मैं आज राजनीति पर बात नहीं करना चाहता। मैंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और मेरे दो पत्र उनके पास हैं।' उन्होंने कहा, 'मैं कल प्रधानमंत्री को सभी मुद्दों के बारे में विस्तार से बताऊंगा। इनमें मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से हुए नुकसान, सरकार की ओर से की जा रही परिसीमन की कवायद के संभावित प्रभाव और महिला आरक्षण का मुद्दा शामिल है। वे इसे लागू क्यों नहीं कर रहे हैं? मैं कल इन सभी मुद्दों पर विस्तार से अपनी बात रखूंगा।'
रिजिजू के बयान के बाद खरगे ने दी प्रतिक्रिया
खरगे की यह टिप्पणी उस समय आई, जब पत्रकारों ने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से उन्हें लिखे गए पत्र पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी। रिजिजू ने खरगे के 16 अक्तूबर के पत्र के जवाब में उन्हें पत्र लिखा था। सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा किए गए अपने पत्र में रिजिजू ने कहा कि सरकार ने प्रस्तावित विधेयक पर कांग्रेस से सहयोग हासिल करने के लिए बार-बार प्रयास किए हैं। इसके लिए मार्च और अप्रैल में लिखित संवाद किया गया था। इसके अलावा खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ भी चर्चा की गई थी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बार-बार अनुरोध किए जाने के बावजूद कांग्रेस ने चर्चा के लिए तारीखें नहीं बताईं। इसके चलते सरकार को द्रमुक (डीएमके), समाजवादी पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), शिवसेना (यूबीटी), एआईएमआईएम और बीजू जनता दल (बीजद) समेत अन्य दलों से विचार-विमर्श करना पड़ा। रिजिजू ने कांग्रेस से रचनात्मक सहयोग करने और महत्वपूर्ण विधेयकों के पारित होने में बाधा नहीं डालने की अपील की।
सरकार खबरें प्लांट कराना बंद करें
वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर पलटवार किया है। कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र की मोदी सरकार से सवाल किया कि वह परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और सभी राजनीतिक दलों की राय एक साझा मंच पर सुनने से इनकार क्यों कर रही है। पार्टी ने यह टिप्पणी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की ओर से लिखे गए पत्र पर पलटवार करते हुए की।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में सवाल उठाया कि क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन को लेकर कोई नया प्रस्ताव है या वह पहले खारिज हो चुके विधेयक को फिर से लाकर दो-तिहाई बहुमत से पारित कराने की एक और कोशिश करना चाहती है। रमेश ने दावा किया कि सरकार की ऐसी कोशिश एक बार फिर नाकाम होगी।
आश्वासन विधेयक में क्यों शामिल नहीं किए गए?
कांग्रेस नेता ने कहा, 'रिजिजू यह नहीं बताते कि गृह मंत्री ने इन बैठकों में कथित तौर पर कुछ आश्वासन दिए थे, जिन्हें 16 अप्रैल, 2026 को विचार के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया था। इस विधेयक को 17 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में निर्णायक तरीके से खारिज कर दिया गया था। किरेन रिजिजू के अनुसार, जिन अधिकांश दलों से विचार-विमर्श किया गया था, उन्होंने भी विधेयक के खिलाफ मतदान किया था।'
उन्होंने पूछा, 'क्या मोदी सरकार के पास परिसीमन को लेकर कोई ठोस नया प्रस्ताव है, जिस पर उसने किसी राजनीतिक दल के साथ चर्चा की है?' कांग्रेस महासचिव ने सवाल किया, 'मोदी सरकार परिसीमन के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने, अपने नए प्रस्ताव को पारदर्शी तरीके से रखने के बजाय अड़ियल रवैया क्यों अपना रही है और एक साझा मंच पर सभी दलों की राय सुनने पर क्यों अड़ी है?'