विरोधी खेमे की चिंता
वसुंधरा का विरोधी खेमा भी बड़ा है। सामने एक नहीं कई चेहरे हैं, लेकिन खुलकर सामने आने में सब हिचकते हैं। एक केन्द्रीय मंत्री तो काफी चिंतित हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का भी मानना है कि सबकुछ मुख्यमंत्री ने हाईजैक कर रखा है। वह राज्य सरकार के जनता से जुड़े कार्यक्रम में भी अकेला चेहरा बनी रहती हैं। अधिकारी और उनकी टीम के लोग ही हाबी रहते हैं। स्थानीय विधायक, सांसद, मंत्री सब केवल शोभा बढ़ाने के लिए वहां होते हैं। किसी को कोई जिम्मेदारी नहीं दी जाती और न ही मंच से बोलने का अवसर दिया जाता है। न ही केन्द्र सरकार की जनता को योजना बताई जाती है। केवल वसुंधरा गुणगान होता है। सूत्र का कहना है कि यही वजह है कि राज्य में कई चेहरे वसुंधरा के खिलाफ हैं।
नाकाफी है पहल
वसुंधरा का विरोधी खेमा भाजपा के केन्द्रीय नेताओं की पहल को नाकाफी मान रहा है। उसका कहना है कि भाजपा अध्यक्ष ने वसुंधरा को चेहरा घोषित करके राज्य विधानसभा चुनाव में जाने की पहल भले ही कर ली है, लेकिन इसका कोई खास जमीनी असर नहीं है। राजस्थान भाजपा के नए अध्यक्ष मदनलाल सैनी का वसुंधरा के मुकाबले कोई कद नहीं है। वह पहले भी पार्टी में किसी बड़े पद पर नहीं रहे हैं। सूत्र का कहना है कि वसुंधरा के पीठ पीछे कोई कुछ भी बोल सकता है, लेकिन सामने न तो मदन लाल सैनी में और न ही भूपेन्द्र यादव में कुछ बोल पाने की हिम्मत है। ऐसे में चुनाव के दौरान भाजपा के वसुंधरा मय हो जाने पर गुजबाजी बढऩे के साथ-साथ सफलता मिलने की संभावना सिमटती जाएगी।
सबकी निगाह भाजपा अध्यक्ष पर
वसुंधरा राजे की टीम जहां भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चार अगस्त की यात्रा का इंतजार कर रही है, वहीं पार्टी के दोनों खेमों की निगाह अमित शाह के मूवमेंट पर टिकी है। अमित शाह ने वसुंधरा राजे के साथ अपने आवास पर दिल्ली में हुई बैठक में साफ कर दिया था कि राज्य में भाजपा का चेहरा वह होंगी, लेकिन चुनाव प्रचार अभियान आदि का संचालन केन्द्रीय ईकाई की मॉनिटरिंग में होगा। इसमें भूपेन्द्र यादव को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है।
ऐसा इसलिए है ताकि भाजपा एकजुटता के साथ चुनाव में जा सके। इससे विरोधी खेमे को टिकट बंटवारे में वसुंधरा की कम चलने की उम्मीद है। उन्हें लग रहा है कि ऐसा हुआ तो चुनाव बाद मुख्यमंत्री के नाम पर पासा पलट सकता है। उनकी इसी उम्मीद को वसुंधरा खत्म करने के लिए हर दांव अजमाने को भी तैयार हैं। 28 जुलाई को जयपुर में गौरव सुराज यात्रा समेत आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बाबत बैठक भी हुई। इसमें केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत अन्य मौजूद थे। सभी ने यात्रा को सफल बनाने की दिशा में एकजुटता के साथ रणनीतिक निर्णय लिया है। राज्य में सत्ता में लौटने के लिए प्रचार-प्रसार की तैयारियां जोरों पर हैं। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर मतदाता सूची के पन्ना प्रमुख पार्टी को सत्ता में लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। हालांकि राज्य सरकार के अधिकारी से लेकर प्रदेश भाजपा के कार्यकर्ता, पदाधिकारी तक मान रहे हैं कि सरकार विरोधी लहर ज्यादा है। चुनौती कड़ी है।