भारत में पोलियो के खिलाफ लड़ाई में जीत हासिल करने में अहम भूमिका निभाने वाले उपायों को अब कोरोना वायरस से जंग में इस्तेमाल किया जाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि संगठन के राष्ट्रीय पोलियो सर्विलांस नेटवर्क और अन्य फील्ड स्टाफ को कोरोना से जंग में व्यवस्थित तरीके से तैनात किया है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा, 'भारत और डब्ल्यूएचओ साथ में अपनी योग्यता और क्षमता का नमूना दिखा चुके हैं। हम पोलियो से छुटकारा पाने में कामयाब रहे थे। आज मैं आपको आपकी क्षमताएं याद दिलाना चाहता हूं और बताना चाहता हूं कि हम साथ मिलकर बड़े लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। ' उन्होंने कहा, 'फील्ड में मौजूद आईडीएसपी, राज्य के रैपिड रिस्पॉन्स दल और डब्ल्यूएचओ- आप सभी कोरोना से जंग में योद्धा हैं। आपके संयुक्त प्रयासों के साथ हम कोरोना को हरा सकते हैं और लोगों की जान बचा सकते हैं।'
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डॉ. हर्षवर्धन के साथ डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह ने भी डब्ल्यूएचओ और बाकी स्टाफ को संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'राष्ट्रीय पोलियो सर्विलांस प्रोजेक्ट ने पोलियो को समाप्त करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी और समय रहते महत्वपूर्ण व सही डाटा उपलब्ध कराया था जिनसे सही नीतियां बनाने में सफलता मिली थी।' उन्होंने कहा, यह समय अपने पूरे अनुभव, ज्ञान और योग्यताओं को इस्तेमाल करने का है जिससे कोरोना वायरस महामारी से चल रही जंग को जीता जा सके।
डॉ. खेत्रपाल ने कहा, भारत के पास अपनी अलग चुनौतियां हैं साथ ही उसके पास उनसे उबरने की क्षमता भी है। साल 2014 में देश से पोलियो का उन्मूलन इसका उदाहरण है। उन्होंने साल 1994 में दिल्ली का स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए पोलियो से निपटने के लिए उठाए गए डॉ. हर्षवर्धन के उपायों की सराहना भी की। उन्होंने कहा कि उनके कई प्रयासों को देश भर में बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया गया, साथ ही कई अन्य देशों ने भी उन्हें अपनाया।