पुणे का कार हादसा आज कल विवादों में हैं। मामले में पुलिस अब एआई उपकरणों का इस्तेमाल करने की योजना कर रही है। एआई उपकरणों से पुलिस दुर्घटना स्थल के डिजिटल पुननिर्माण की कोशिश करेगी। वहीं, मामले में महाराष्ट्र सरकार ने राज्य संचालित ससून जनरल अस्पताल के दो डॉक्टरों और एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया।
डिजिटल पुनर्निर्माण में इन-इन चीजों को बनाया जाएगा
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना स्थलों के पुनर्निर्माण के लिए अभी तक ऐसे एआई उपकरणों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। हालांकि, शव के पुनर्निर्माण के लिए इनका उपयोग किया गया है। हमारा लक्ष्य है कि एआई उपकरणों की मदद से पूरे दुर्घटना और अपराध स्थल का विस्तार से पुनर्निर्माण करना है। अधिकारी का कहना है कि पुननिर्माण में किशोर के घर से कोसी रेस्टोरेंट से मुंधवा इलाके के ब्लाक क्लब और क्लब से कल्याणी नगर इलाके में दुर्घटना स्थल तक के मार्गों को बनाया जाएगा। कई एआई सिम्युलेटेड मॉडल और सॉफ्टवेयर हैं, जिनमें अगर सीसीटीवी कैमरा फुटेज, फोटो या स्पॉट फोटो इनपुट किए जाए तो वे कुछ इमेज या 3डी वॉक-थ्रू बना सकते हैं। पुलिस ने भी बड़ी मात्रा में सीसीटीवी फुटेज एकत्र की थी, जो दुर्घटना स्थल के डिजिटल पुनर्निर्माण में काम आएगी।
दो डॉक्टर निलंबित
मामले में महाराष्ट्र सरकार ने राज्य संचालित ससून जनरल अस्पताल के दो डॉक्टरों और एक कर्मचारी को निलंबित कर दिया। बुधवार को यह आदेश जारी किए गए। दो दिन पहले ही उन्हें हादसे के आरोपी नाबालिग चालक के ब्लड सैंपल में कथित हेरफेर के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। साथ ही, बी जे मेडिकल कॉलेज और ससून सिविल अस्पताल के डीन डॉ. विनायक काले को भी अनिवार्य अवकाश पर भेज दिया गया है। महाराष्ट्र के चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ ने बताया कि राज्य सरकार को तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट मिल चुकी है। रिपोर्ट के आधार पर दोनों डॉक्टरों को निलंबित करने के आदेश दे दिए गए हैं।
अब जानें पूरा मामला
पूरा मामला शुरू होता है रविवार से। रविवार तड़के 17 साल का आरोपी नशे में लग्जरी कार चला रहा था। इस दौरान उसने एक बाइक को टक्कर मार दी। इसमें दो लोगों की मौत हो गई। दोनों पेशे से इंजीनियर थे। आसपास के लोगों ने आरोपी को पहले तो खूब पीटा फिर पुलिस को सौंप दिया। मृतकों की पहचान अनीश अवधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में हुई है। दोनों पार्टी करके घर जा रहे थे।
केस दर्ज कर कोर्ट में पेश किया, बाद में रिहाई हुई
आरोपी के खिलाफ येरवडा पुलिस स्टेशन में 279 (रैश ड्राइविंग), 304 ए (लापरवाही से मौत), 337 (मानव जीवन को खतरे में डालना) और 338 (गंभीर चोट पहुंचाना) सहित अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। आरोपी को हिरासत में भी लिया गया। रविवार को ही उसे कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने उसे निबंध लिखने की सजा देकर रिहा कर दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी और उसे अवलोकन गृह भेज दिया। पुलिस ने आरोपी के पिता सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया।