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खतरा : हवा में घुल रहा जहर फुला रहा दिमाग की नसें, विज्ञानियों का दावा-जितना अधिक प्रदूषण, उतना गंभीर रोग

Fri, 12 May 2023 06:02 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

चूहों पर किए गए शोध से पता चला कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से मस्तिष्क में सूजन (न्यूरोइन्फ्लेमेशन) का खतरा बढ़ जाता है। 
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मस्तिष्क पर असर - फोटो : Istock
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विस्तार
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वायु प्रदूषण का दिमाग पर भी सीधा असर होता है। जापान की हिरोशिमा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यशुहिरो इशिहारा ने प्रदूषण के मस्तिष्क पर प्रभावों को लेकर शोध में यह दावा किया है। यह अध्ययन पार्टिकल एंड फाइबर टॉक्सिकोलॉजी जर्नल में प्रकाशित किया गया है। प्रो. इशिहारा के मुताबिक चूहों पर किए गए शोध से पता चला कि वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से मस्तिष्क में सूजन (न्यूरोइन्फ्लेमेशन) का खतरा बढ़ जाता है। 

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खासतौर पर स्केमिक स्ट्रोक (रक्तापूर्ति में बाधा से लगे आघात) के बाद प्रोग्नोसिस (रोग निदान की संभावना) पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। मसलन, रोगी जितने ज्यादा प्रदूषण के संपर्क में रहेगा, उसका रोग उतना ही गंभीर होगा और उसके स्वस्थ होने में समय भी ज्यादा लगेगा। हालांकि, इस प्रक्रिया का सटीक तंत्र अज्ञात है, जिसे लेकर आगे भी शोध किए जाने की जरूरत है। 
बीजिंग की हवा सूंघ पस्त हुए चूहे
शोध के दौरान चूहों के एक समूह को एक सप्ताह तक चीन के बीजिंग शहर की प्रदूषित हवा के संपर्क में रखा गया। इन चूहों में दूसरे (स्वच्छ हवा में रखे गए) चूहों की तुलना में न्यूरोइन्फ्लेमेशन की स्थिति पाई गई। बाद में इन्हें इस्केमिक स्ट्रोक दिया गया, तो सूजन और तेजी से बढ़ी। हालांकि कुछ उपचारित चूहे, जिनमें बीजिंग के प्रदूषण से निकलने वाले रसायनों के लिए रिसेप्टर नहीं थे, वे इससे बेअसर रहे।
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शहरी प्रदूषण में जीवाश्म ईंधन, लकड़ी, कचरा और तंबाकू जैसी चीजों के जलने पर पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन (पीएएच) पैदा होते हैं। मोटे तौर पर अध्ययन से यह पता चला कि न्यूरोइन्फ्लेमेशन व इस्केमिक स्ट्रोक के बाद गति विकार पैदा होने में वायू प्रदूषण (पीएएच) की अहम भूमिका है।

वायु प्रदूषण से बचाने की कोशिश करता है शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र
जैसे ही चूहे वायु प्रदूषण के संपर्क में आए उनके प्रतिरक्षा तंत्र की माइक्रोग्लियल कोशिकाएं सक्रिय हो गईं। एक तरह से ये प्रदूषण के खिलाफ मस्तिष्क को बचाने की शरीर की स्वतः शुरू होने वाली प्रक्रिया है। लेकिन, लगातार प्रदूषण की वजह से न्यूरोइन्फ्लेमेशन की स्थिति पैदा हो जाती है।

शोध में बीजिंग की प्रदूषित वायु के अलावा पीएम 2.5 कणों का भी इस्तेमाल किया गया, जिनका समान प्रभाव दिखा। इसमें यह भी पता चला कि शहरों में पीएम 2.5 कण पीएएच के वाहक होते हैं, जो न्यूरोइन्फ्लेमेशन बढ़ाते हैं और इस्केमिक स्ट्रोक का प्रोग्नोसिस घटाते हैं।

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