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बाघों की मौत का सबसे बड़ा कारण अवैध शिकार, 76 मौत चिंता की वजह

Mon, 07 Nov 2016 11:54 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
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चिड़ियाघर में फिर होगा मिलन - फोटो : अमर उजाला
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बाघों का संरक्षण करने वाले संगठनों और सरकार के लिए 'टाइगरनेट' और 'ट्रैफिक-इंडिया' के ताजा आंकड़े चिंता का विषय बन सकते हैं। आंकड़ो के अनुसार इस साल जनवरी से अक्टूबर तक कुल 76 बाघों की मौत हुई है, इसमें मध्य प्रदेश सभी राज्यों के मुकाबले सबसे आगे है। कर्नाटक 13 बाघों की मौत के साथ दूसरे नंबर पर है। हालांकि 76 बाघों की मौत में से 41 मौतों के पीछे के कारणों की जांच चल रही है।
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इससे पहले 2010 में भी बाघों की मौतों का एक बड़ा मामला देखने को मिला था। 2015 में 69 बाघों की मृत्यु दर्ज की गई थी, लेकिन इस साल आंकड़ों में बढ़ोतरी चिंता का विषय है। इस बढ़ोतरी ने देशभर में चल रही बाघों के अंगों की अवैध तस्करी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। बाघों की मौत कारण के पीछे अवैध शिकार, जहर, बिजली की चपेट में आना, सड़क दुर्घटना और बाघों की आपस में लड़ाई जैसे कारण शामिल हैं।
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बाघों को मारकर खाने और उनका खून पीने के आरोप में कैद था शिकारी - फोटो : gettyimages
'ट्रैफिक-इंडिया' के प्रमुख कुमार नीरज ने बताया कि "हर साल अगस्त से नवंबर के बीच बाघों की मौत के मामलों में बढ़ोत्तरी देखने को मिलती है, जिसके पीछे के कारणों का पता नहीं चल सका है। इस साल के मृत्यु-दर में 10 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी और अवैध शिकार के मामलों में 150 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी चिंता का विषय है।"

'कन्सर्वेशन एक्शन ट्रस्ट' एनजीओ की संस्थापक देबी गोएंका ने बताया कि "बाघों को रहने के लिए प्राकतिक स्थान नहीं मिल पा रहा है, जिसकी वजह से वो सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। हालांकि हमें कई ऐसे मौके भी देखने को मिले जब बाघों की संख्या में इजाफा देखने को मिला"।   
 
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