सूत्रों के मुताबिक, डोमिनिका में मेहुल चोकसी को डिटेन किए जाने के बाद से ही भारतीय एजेंसियां और अधिकारी उसे भारत वापस लाने के विकल्प तलाश रहे हैं। मेहुल चोकसी के डिटेंशन के बारे में सीबीआई को भी इंटरपोल से जानकारी मिली है।
अगर कानूनी दांव पेंच फंसे तो...
एंटीगुआ की सरकार पहले ही डोमिनिका की सरकार से मेहुल चोकसी को भारत को सौंपने का अनुरोध कर चुकी है। ऐसे में अगर किसी तरह के कानूनी दांव पेंच फंसते हैं तो भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी को एंटीगुआ को ही सौंपा जाएगा। उसके बाद वहां से ही भारत के लिए प्रत्यर्पण होगा।
वर्ष 2018 में जनवरी की शुरुआत में पंजाब नेशनल बैंक में करीब 13 हजार करोड़ रुपये का घोटाला होने का खुलासा हुआ था। इस मामले में 30 जनवरी को सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन उससे पहले ही इस घोटाले के दो मुख्य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी भारत छोड़कर भाग गए थे। तब से ही दोनों आरोपियों के प्रत्यर्पण की कोशिश की जा रही है। नीरव मोदी ब्रिटेन की जेल में है और वहां के गृह मंत्रालय ने उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। हालांकि, इसके खिलाफ नीरव मोदी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
बता दें कि मेहुल चोकसी के डोमिनिका में पकड़े जाने के बाद एंटीगुआ के प्रधानमंत्री ब्राउने कहा, 'डोमिनिका अथॉरिटी उसे एंटीगुआ प्रत्यर्पित न करें। उसे सीधे भारत लौटाने की जरूरत है, जहां वह अपने खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों का सामना कर सके।'