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भारत ने हांग-कांग से मांगा भगोड़ा नीरव मोदी, अब तक नहीं मिला कोई जवाब

Fri, 13 Apr 2018 07:13 PM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
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भारत सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह डायमंड कारोबारी नीरव मोदी को गिरफ्तार करने के अनुरोध पर हांगकांग के अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) कर्ज घोटाले में वांछित है। बता दें कि गिरफ्तारी के लिए भारत सरकार को आग्रह भेजे हुए करीब 21 दिन हो चुके हैं।

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केंद्रीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारत ने हांगकांग के अधिकारियों से दोनों देशों के बीच 1997 में हुए भगोड़े अपराधियों के आत्मसमर्पण के लिए प्रत्यर्पण समझौते के तहत नीरव मोदी को सौंपे जाने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा, हांगकांग में हमारे मिशन ने बताया है कि वहां का न्यायिक विभाग अभी भी हमारे आग्रह की जांच कर रहा है। हम हांगकांग के अधिकारियों की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।

पिछले सप्ताह राज्य सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में विदेश राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा था कि हांगकांग विशेष प्रशासनिक क्षेत्र की सरकार को 23 मार्च को भारतीय आग्रह भेज दिया गया था। इस सप्ताह के शुरू में चीन ने कहा था कि हांगकांग नीरव मोदी को गिरफ्तार करने का भारतीय आग्रह स्थानीय कानूनों और आपसी न्यायिक सहायता करार के तहत मान सकता है। बता दें कि हांगकांग चीन का ही स्वशासित क्षेत्र है।

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मेहुल चोकसी के लिए कोई आग्रह नहीं

पीएनबी घोटाले में ही एक अन्य वांछित मेहुल चोकसी के अमेरिका में होने की खबरों पर वहां की सरकार से संपर्क किए जाने को लेकर विदेश् मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है। 

रवीश कुमार से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इतना ही कहा कि मंत्रालय मात्र तभी ऐसा कुछ करता है, जब किसी भगोड़े की लोकेशन स्पष्ट होती है। बता दें कि चोकसी के अमेरिका में होने की बात कुछ मीडिया रिपोर्ट में सामने आई थी। रवीश कुमार ने कहा, सामान्यतौर पर हम जांच एजेंसियों की तरफ से जानकारी मिलने पर ही हम अपनी गुजारिश भेजते हैं। हमने कुछ नहीं किया, क्योंकि हम उसका ठिकाना नहीं जानते हैं।

सीबीआई ने दो एसबीआई अधिकारियों से पूछताछ की

करीब 13 हजार करोड़ रुपये के पीएनबी कर्ज घोटाले की जांच के सिलसिले में सीबीआई ने बृहस्पतिवार को भारतीय स्टेट बैंक के दो उप महाप्रबंधक स्तर के अधिकारियों से पूछताछ की। इनमें से एक अधिकारी बैं की जर्मनी के फ्रेंकफर्ट और दूसरा मॉरीशस ब्रांच में तैनात है। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, उनकी जांच मुंबई की ब्रैडी हाउस ब्रांच से घोटाला कर भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं के नाम अरबों रुपये के लैटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) जारी करा लिए।
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