प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यालय से चुनाव आयोग को कहा गया था कि लोकसभा और राज्यों के विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएं। यह खुलासा इंडियन एक्सप्रेस की आरटीआई दाखिल करने के बाद हुआ है। अंग्रेजी अखबार पर प्रकाशित खबर के मुताबिक पिछले वर्ष ही पीएमओ से चुनाव आयोग को इस संबंध में कॉल गई थी। लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराने की बात ने इस साल उस वक्त सुर्खियां पकड़ी थीं, जब मार्च में पीएम नरेंद्र मोदी ने बीजेपी की एक गोष्ठी में यह बात कही थी। लेकिन तब यह बात सामने नहीं आई थी कि 2014 में मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साल भर बाद ही पीएमओ ने चुनाव आयोग से सीधे इस मामले में बात की थी।
एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ने नाम न छापने की शर्त पर इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पीएमओ और चुनाव आयोग के बीच में बातचीत होना बहुत ही दुर्लभ और असाधारण मामला है, लेकिन अनुचित नहीं। चुनाव संबंधी मामलों पर चुनाव आयोग सरकार के कानून और गृहमंत्रालय से सीमित बात करता है।
उन्होंने कहा कि 28 जनवरी 2015 के दिन उन्हें राज्यों के मुख्य चुनाव आयुक्त एचएस ब्रह्मा और पीएम के प्रधान सचिव निरिपेंद्र मिश्रा का हस्ताक्षर किया पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि सरकार लोकसभा और राज्यों के चुनाव हर हाल में एक साथ कराने का विचार रखती है।