प्रधानमंत्री मुद्रा योजना अब अपने 10 साल पूरे करने वाली है। अप्रैल 2015 में शुरू हुई योजना का अच्छा रिस्पांस देखने को मिल रहा है। योजना के दस वर्ष होने पर एसबीआई रिसर्च की एक नई रिपोर्ट सामने आई है। PMMY: A Decade of Audacious Dreams शीर्षक वाली यह रिपोर्ट बताती है कि इस योजना के तहत 33 लाख करोड़ रुपए के लोन बांटे गए है। जबकि 10 वर्षों में 52 करोड़ से ज्यादा खाते खोले गए है। रिपोर्ट में इस योजना की सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने वाली भूमिका को भी प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के खाताधारकों में 68 प्रतिशत महिलाएं है। इनमें 50 प्रतिशत लाभार्थी एससी, एसटी या ओबीसी वर्ग से हैं। महिला लाभार्थियों की संख्या के लिहाज से बिहार, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सबसे आगे हैं जबकि कुल महिला भागीदारी के प्रतिशत के आधार पर महाराष्ट्र, झारखंड और पश्चिम बंगाल टॉप पर हैं।
यह रिपोर्ट बताती है कि, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत पिछले 10 वर्षों में कुल स्वीकृत ऋण 33 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर चुका है। वित्त वर्ष 2014 में जहां यह आंकड़ा 8.5 रुपए लाख करोड़ था। वहीं, वित्त वर्ष 2024 में यह बढ़कर 27.25 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। अनुमानों के मुताबिक, यह आंकड़ा वित्त वर्ष 2025 में 30 लाख करोड़ रुपए से भी ऊपर जा सकता है।
योजना के पहले तीन वर्षों में बांटे गए लोन अमाउंट की औसत वृद्धि दर 33 प्रतिशत रही, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसमें गिरावट आई। हालांकि, वित्त वर्ष 2023 में इसमें लगभग 36 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो भारत की आर्थिक संरचना के सबसे निचले स्तर पर उद्यमशीलता की वापसी का संकेत देती है। औसतन प्रति ऋण राशि लगभग तीन गुना बढ़ गई है—वित्त वर्ष 2016 में जहां यह 38,000 रुपए थी। वहीं वित्त वर्ष 2023 में बढ़कर 72,000 रुपए और वित्त वर्ष 2025 में 1.02 लाख रुपए तक पहुंच गई है।
पिछले 10 वर्षों में, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत कुल 52 करोड़ से ज्यादा खाते खोले गए हैं, जिनमें से 78 प्रतिशत खाते शिशु श्रेणी (40 करोड़), 20 प्रतिशत किशोर (10 करोड़) और 2 प्रतिशत तरुण/तरुण प्लस (~2 करोड़) श्रेणी के हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि, शिशु खातों की कुल हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2016 में 93 प्रतिशत थी, जो वित्त वर्ष 2025 में घटकर 51.7 प्रतिशत रह गई है। वहीं, किशोर खातों की हिस्सेदारी 2016 में 5.9 प्रतिशत थी, जो बढ़कर 2025 में 44.7 प्रतिशत हो गई है।
यह है प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
केंद्र सरकार ने सूक्ष्म और लघु उद्यमों को किफायती दर पर कर्ज देने के लिए 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना शुरू की थी। मुद्रा लोन अब चार श्रेणियों जैसे शिशु, किशोर तरुण और तरुण प्लस के तहत प्रोवाइड किए जाएंगे।
शिशु: 50,000/- रुपये तक के लोन मिलते हैं।
किशोर: 50,000/- रुपये से 5 लाख रुपये तक के लोन मिलते हैं।
तरुण: 5 लाख रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन शामिल हैं।
तरुण प्लस: 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक के लोन मिलते हैं।
मुद्रा योजना ने 10 लाख रुपये तक का लोन प्रोवाइड करके गैर-कॉर्पोरेट, गैर-कृषि लघु और सूक्ष्म उद्यमों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई है। वित्त मंत्री ने 23 जुलाई, 2024 को केंद्रीय बजट 2024-25 के दौरान लोन लिमिट को बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने की घोषणा की। यह नई सीमा 24 अक्टूबर, 2024 को प्रभावी हुई। इस घोषणा में तरुण प्लस कैटेगरी भी पेश की गई। तरुण प्लस लोन उन लोगों के लिए है जिन्होंने पहले तरुण श्रेणी के तहत लोन लिया है और उसे सफलतापूर्वक चुकाया है, जिससे उन्हें 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये के बीच ऋण प्राप्त करने की सुविधा मिलती है। बता दें कि योजना के तहत ऋणदाता संस्थानों (एमएलआई) जैसे अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (आरआरबी), लघु वित्त बैंक (एसएफबी), गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी), सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई) आदि द्वारा 20 लाख रुपये तक के जमानत मुक्त लोन दिए जाते है।