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PM Vishwakarma: 2024 के लोकसभा चुनाव पर कितना असर डालेगी यह योजना? जानें पीएम विश्वकर्मा के बारे में सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 17 Sep 2023 05:12 AM IST

सार

PM Vishwakarma: पीएम विश्वकर्मा पारंपरिक कौशल वाले लोगों का समर्थन करने वाली योजना है। विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में विश्वकर्मा योजना की घोषणा 2024 लोकसभा चुनाव के लिए भी भाजपा की एक रणनीति दिखती है। 
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पीएम विश्वकर्मा - फोटो : AMAR UJALA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्वकर्मा जयंती पर आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर पर 'पीएम विश्वकर्मा' नाम से एक नई योजना का शुभारंभ करेंगे। 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एलान किया था कि वह सुनार, सुतार, राजमिस्त्री, बाल काटने वाले, औजारों-हाथों से काम करने वाले वर्ग को नई ताकत देने वाले हैं। इसके लिए वह विश्वकर्मा जयंती पर विश्वकर्मा योजना शुरू करेंगे।

इससे पहले बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने भी इस योजना का उल्लेख किया था। अब इस योजना की आधिकारिक शुरुआत होने जा रही है। सवाल उठता है कि आखिर क्या है पीएम विश्वकर्मा? इस योजना का उद्देश्य क्या है? इससे किस वर्ग को लाभ मिलेगा? क्या विश्वकर्मा योजना के जरिए अति पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश होगी? इसका 2024 के चुनाव पर क्या असर होगा? आइये जानते हैं...
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पीएम विश्वकर्मा - फोटो : AMAR UJALA
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्वकर्मा जयंती पर आज नई दिल्ली के द्वारका स्थित इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर पर 'पीएम विश्वकर्मा' नाम से एक नई योजना का शुभारंभ करेंगे। 77वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने एलान किया था कि वह सुनार, सुतार, राजमिस्त्री, बाल काटने वाले, औजारों-हाथों से काम करने वाले वर्ग को नई ताकत देने वाले हैं। इसके लिए वह विश्वकर्मा जयंती पर विश्वकर्मा योजना शुरू करेंगे।

इससे पहले बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री ने भी इस योजना का उल्लेख किया था। अब इस योजना की आधिकारिक शुरुआत होने जा रही है। सवाल उठता है कि आखिर क्या है पीएम विश्वकर्मा? इस योजना का उद्देश्य क्या है? इससे किस वर्ग को लाभ मिलेगा? क्या विश्वकर्मा योजना के जरिए अति पिछड़ी जातियों को साधने की कोशिश होगी? इसका 2024 के चुनाव पर क्या असर होगा? आइये जानते हैं...

PM Vishwakarma Yojana - फोटो : Istock
क्या है पीएम विश्वकर्मा? 
पीएम विश्वकर्मा पारंपरिक कौशल वाले लोगों का समर्थन करने वाली योजना है। इस योजना के तहत उदार शर्तों पर तीन लाख रुपये तक का लोन दिया जाएगा। इस योजना के शुरू होने से देशभर के करीब 30 लाख विश्वकर्मा परिवारों को फायदा मिल सकता है। 

इसके जरिए पारंपरिक शिल्प में लगे लोगों को सहायता प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित होगा। सरकार की मानें तो यह फोकस न केवल कारीगरों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से सहायता प्रदान करने बल्कि स्थानीय उत्पादों, कला और शिल्प के माध्यम से सदियों पुरानी परंपरा, संस्कृति और विविध विरासत को जीवित और समृद्ध बनाए रखने की इच्छा से भी प्रेरित है। 

PM Vishwakarma Yojana - फोटो : Istock
योजना का लाभ कैसे मिलेगा?
पीएम विश्वकर्मा को 13,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित किया जाएगा। इस योजना के तहत, बायोमेट्रिक आधारित पीएम विश्वकर्मा पोर्टल का उपयोग करके सामान्य सेवा केंद्रों के माध्यम से विश्वकर्माओं का निशुल्क पंजीकरण किया जाएगा। उन्हें पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान-पत्र, मूलभूत और उन्नत प्रशिक्षण से जुड़े कौशल उन्नयन, 15,000 रुपये का टूलकिट प्रोत्साहन, पांच प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर एक लाख रुपये (पहली किश्त) और दो लाख रुपये (दूसरी किश्त) तक मुक्त ऋण सहायता, डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साहन और विपणन सहायता के माध्यम से मान्यता प्रदान की जाएगी।

PM Vishwakarma Yojana - फोटो : Istock
इस योजना का उद्देश्य क्या है? 
इस योजना का उद्देश्य गुरु-शिष्य परंपरा या अपने हाथों और औजारों से काम करने वाले विश्वकर्माओं द्वारा पारंपरिक कौशल के परिवार-आधारित प्रथा को सुदृढ़ बनाना और पोषित करना है। पीएम विश्वकर्मा का मुख्य फोकस कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की पहुंच के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार करना और यह सुनिश्चित करना है कि वे घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत हों।

PM Vishwakarma Yojana - फोटो : Istock
इससे किस वर्ग को लाभ मिलेगा? 
यह योजना पूरे भारत में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कारीगरों और शिल्पकारों को सहायता प्रदान करेगी। पीएम विश्वकर्मा के अंतर्गत अठारह पारंपरिक शिल्पों को शामिल किया जाएगा। इनमें ये लोग शामिल हैं:

(i) बढ़ई 
(ii) नौका निर्माता 
(iii) शस्त्रसाज 
(iv) लोहार 
(v) हथौड़ा और टूल किट निर्माता 
(vi) ताला बनाने वाले 
(vii) सुनार 
(viii) कुम्हार
(ix) मूर्तिकार, पत्थर तोड़ने वाले 
(x) मोची (जूता कारीगर) 
(xi) राजमिस्त्री 
(xii) टोकरी/चटाई/झाड़ू निर्माता/कॉयर बुनकर 
(xiii) गुड़िया और खिलौना निर्माता (पारंपरिक) 
(xiv) नाई 
(xv) माला बनाने वाले 
(xvi) धोबी 
(xvii) दर्जी 
(xviii) मछली पकड़ने का जाल बनाने वाले 

NDA vs INDIA - फोटो : Amar Ujala
इसका 2024 के चुनाव पर क्या असर होगा? 
2024 के चुनाव के नजदीक आने के साथ देशभर में इंडिया गठबंधन के दल जाति जनगणना की मांग को लगातार उठा रहे हैं जिसके पक्ष में भाजपा नहीं है। हालांकि, भाजपा इस मांग को बेअसर करने की कोशिश लगातार कर रही है। जानकर मानते हैं कि भाजपा को उम्मीद है कि वह विश्वकर्मा योजना के माध्यम से कारीगरों, शिल्पकारों अति पिछड़े समुदाय को लुभाकर ओबीसी पर पकड़ और मजबूत करेगी। 

विशेषज्ञ कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में विश्वकर्मा योजना की घोषणा 2024 लोकसभा चुनाव के लिए भी भाजपा की एक रणनीति दिखती है। इंडिया गठबंधन बनने के बाद भाजपा के सामने उत्तर भारत में बड़े ओबीसी नेताओं अखिलेश यादव, लालू प्रसाद, तेजस्वी यादव, नीतीश कुमार और भूपेश बघेल के जरिए बड़े और अधिक शक्तिशाली ओबीसी समूहों का समर्थन की चुनौती हो सकती है। लिहाजा पार्टी लोहार, बरहाई, कहार, नाई और धोबी जैसे कई छोटे लेकिन संख्यात्मक रूप से बड़े पिछड़े समूहों के समर्थन को मजबूत करने के लिए अब हर संभव प्रयास कर रही है। अति पिछड़ों की आबादी लगभग 30 फीसदी हो सकती है।

भाजपा की नजर कुछ समय से कारीगर जातियों या सर्वाधिक पिछड़ी जातियों (एमबीसी) के समर्थन पर है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को विशेष रूप से ओबीसी समुदाय को मदद करेगी।
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